Ganga Mai ki Betiyan 27th June 2026/Image Credit: ScreenGrab / Youtube / @TellyChakkar
Ganga Mai ki Betiyan: ‘ZEE TV’ का सबसे पसंदीदा शो ‘गंगा माई की बेटियाँ’ के आगामी एपिसोड में जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने मिलेगा। जहाँ एक ओर, स्नेहा की नौकरी का पहला दिन ही ख़राब हो जाता है और दूसरी ओर दुर्गावती के राजनीतिक सपनों को भी गहरा धक्का लगता है।
दुर्गावती की पार्टी का टिकट मिलने की ख़ुशी, ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती.. क्योंकि पार्टी के सीनियर लीडर उनके घर आते हैं और उनकी लोकप्रियता की सराहना करते हुए, चुनाव में उनके जीतने की उम्मीद जताते हैं। लेकिन, कहानी में ट्विस्ट तो तब आता है जब उन्हें पता चलता है कि दुर्गावती की बहु नौकरी की तलाश कर रही है, यह बात सामने आते ही पूरा माहौल बदल जाता है।
नेता दुर्गावती पर सवाल उठाते हैं कि इससे चुनाव प्रचार के दौरान, जनता के बीच पार्टी की छवि ख़राब हो सकती है। वे दुर्गावती को चेतावनी देते हैं कि जनता इस विषय में चर्चा कर सकती है कि इतने प्रतिष्ठित परिवार की बहु को नौकरी करने की क्या ज़रूरत आन पड़ी? एक सीनियर लीडर तो तंज कस्ते हुए यह तक कह देता है कि शायद पार्टी ने उन्हें चुनाव का टिकट देकर गलती कर दी है। उनकी बातें सुन, दुर्गावती स्तब्ध रह जाती है और अपने राजनितिक भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हो जाती है।
आख़िरकार स्नेहा को नौकरी मिल जाती है और वह ख़ुशी-ख़ुशी यह ख़बर फ़ोन पर गंगा को बताती है। गंगा बहुत खुश होती है लेकिन साथ ही वह स्नेहा को उसके ससुराल वालों के स्वभाव को लेकर सतर्क रहने और परिवार को संभालने की सलाह देती है। गंगा का क़र्ज़ चुकाने और ईमानदारी से पैसे कमाने के दृढ़ इरादे के साथ, स्नेहा अपने काम का पहला दिन शुरू करती है।
लेकिन तेज का मकसद, स्नेहा के सपनों को कुचलना है। दुर्गावती और स्नेहा के बीच झगड़ा करवाने के इरादे से तेज, स्नेहा के काम की जगह पर पहुँचकर वहां हंगामा खड़ा कर देता है ताकि पहले ही दिन उसकी नौकरी दाव पर लग जाए, किन्तु इस बार उसका पाला स्नेहा से पड़ा है जो उसका हर वार सहकर, चुप रहने वालों में से तो बिलकुल भी नहीं है।
स्नेहा, तेज की बदसलूखी के आगे घुटने टेकने की बजाय, उसे कड़ी चेतावनी देती है और उसे गाल पर सबके सामने एक जोरदार थप्पड़ जड़ देती है। स्नेहा का यह खौफनाक और निडर रूप देखकर, तेज के होश उड़ जाते हैं और उसे समझ आ जाता है कि अब स्नेहा को डराना या दबाना उसके बस की बात नहीं है।
दुर्भाग्यवश, इस हंगामे की कीमत स्नेहा को अपनी नौकरी गवांकर चुकानी पड़ती है और वह बेहद निराश हो जाती है। भले ही इस बार तेज, स्नेहा की नौकरी छीनने में सफल हो गया किन्तु वह स्नेहा के आत्मसम्मान को नहीं कुचल पता। इस हार से स्नेहा का हौंसला कमज़ोर होने की बजाय और ज्यादा मज़बूत हो जाता है।
अब आने वाले एपिसोड में यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि क्या दुर्गावती, अपने चुनाव की टिकट के खतरे में पड़ने का दोष स्नेहा के सिर मढ़ेगी? क्या तेज की लगातार बढ़ती हुई साजिशें उसके बुरे इरादों को उजागर कर देंगी? नौकरी खोने के बाद, अब स्नेहा अपने बुलंद हौंसलों के साथ कैसे करेगी पलटवार?