एशियाई खेलों से पहले ईशा सिंह बोलीं, मेरा मुकाबला सिर्फ खुद से है

एशियाई खेलों से पहले ईशा सिंह बोलीं, मेरा मुकाबला सिर्फ खुद से है

एशियाई खेलों से पहले ईशा सिंह बोलीं, मेरा मुकाबला सिर्फ खुद से है
Modified Date: August 20, 2026 / 07:36 pm IST
Published Date: August 20, 2026 7:36 pm IST

मुंबई, 20 अगस्त (भाषा) शीर्ष रैंकिंग वाली 25 मीटर पिस्टल निशानेबाज ईशा सिंह इस सत्र में विश्व कप स्वर्ण पदक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं लेकिन अगले महीने होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी में जुटी इस 21 वर्षीय निशानेबाज का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती खुद को बेहतर बनाना है।

ईशा ने मई में म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप में 25 मीटर पिस्टल का स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन यांग जी इन को पीछे छोड़ा था। उन्होंने फाइनल में 50 में से 43 निशाने लगाकर सीनियर और जूनियर दोनों स्तरों पर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।

ईशा ने बृहस्पतिवार को पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैं खुद से कहती हूं कि मेरा मुकाबला सिर्फ स्वयं से है। मेरा लक्ष्य किसी को हराना या किसी और का पीछा करना नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक यह साल शानदार रहा है। मैं अपने प्रदर्शन से बहुत खुश हूं। जिस तरह चीजें आगे बढ़ रही हैं, उससे मैं कुल मिलाकर बहुत संतुष्ट हूं। यह मेरे प्रशिक्षण में किए जा रहे काम का नतीजा है। मैं उसे अमल में ला पा रही हूं और इससे मेरे खेल में सुधार हो रहा है।’’

ईशा ने कहा कि हाल के अच्छे प्रदर्शन से एशियाई खेलों से पहले उनका आत्मविश्वास बढ़ा है जिनकी शुरुआत में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है।

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि यह उस काम का नतीजा है जो मैं कर रही हूं। जब आपको सिर्फ पदक ही नहीं, बल्कि अपने पूरे प्रदर्शन के बेहतर होने का अहसास होता है तो बहुत संतुष्टि और आत्मविश्वास मिलता है।’’

म्यूनिख में कांस्य पदक जीतने वाली मनु भाकर से आगे रहने के बारे में पूछे जाने पर ईशा ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी दल के सदस्यों के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन हर खिलाड़ी अपनी तैयारी पर ध्यान देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मेरे और मनु के बीच ही नहीं, बल्कि पूरी टीम के सदस्यों के बीच अच्छे संबंध हैं। हालांकि मुझे नहीं लगता कि अब तक कभी ऐसी बातचीत हुई है जिसमें हम एक-दूसरे की तकनीक में मदद कर रहे हों, क्योंकि हमारे खेल में तकनीक काफी व्यक्तिगत होती है।’’

इस युवा निशानेबाज ने मानसिक रूप से तरोताजा रहने के लिए खेल से दूर समय बिताने को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या खेल से इतर गतिविधियों ने उनके प्रदर्शन में मदद की है तो ईशा ने कहा, ‘‘मैंने खुद से यह सवाल किया क्योंकि मुझे महसूस होने लगा था कि जब आप किसी खिलाड़ी के बारे में सोचते हैं तो लगता है कि वह सब कुछ त्याग देता है और उसकी जिंदगी में कोई मौज-मस्ती नहीं होती। हम सिर्फ प्रशिक्षण और कड़ी मेहनत करते रहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसी चीजें करती हूं जिनके बारे में मुझे लगता है कि इस समय मुझे यह करना चाहिए क्योंकि इस पल को जीना जरूरी है और इतनी दूर की चीजों के बारे में नहीं सोचना चाहिए।’’

ईशा ने कहा कि उन्होंने अपनी प्रशिक्षण पद्धति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है और इसके बजाय बुनियादी चीजों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

विश्व कप स्वर्ण और दुनिया की नंबर एक रैंकिंग अपने नाम कर चुकी ईशा अब भारत के पदक खाते में और इजाफा करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य सिर्फ इतना है कि तिरंगा सबसे ऊंचा लहराए और मैं अपने देश के लिए जितनी ज्यादा उपलब्धियां हासिल कर सकती हूं, करूं।’’

भाषा सुधीर नमिता

नमिता


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