बरवाल की नजरें अब एशियाई खेलों के मैराथन पदक पर

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बरवाल की नजरें अब एशियाई खेलों के मैराथन पदक पर

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 07:26 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 07:26 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) हाल में भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद मैराथन धावक सावन बरवाल का लक्ष्य एशियाई खेलों में देश के लिए 1982 के बाद इस दूरी का पहला पदक जीतना है।

मैराथन में भारत का आखिरी एशियाई खेल पदक होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने 1982 में नयी दिल्ली में जीता था। उससे पहले छोटा सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में हुए शुरूआती 1951 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

महान एथलीट शिवनाथ सिंह ने 48 साल तक 2:12:00 का राष्ट्रीय मैराथन रिकॉर्ड अपने नाम किया था। लेकिन 28 साल के बरवाल ने रविवार को एनएन रॉटरडैम मैराथन में उस लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को तोड़ दिया और 2:11:58 के नए समय के साथ 20वें स्थान पर रहे।

बरवाल ने पीटीआई से कहा, ‘‘इस साल मेरा मुख्य लक्ष्य एशियाई खेल होंगे और मैं वहां पदक जीतना चाहता हूं। मैं बहुत ज्यादा टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लूंगा। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैं अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड और बेहतर कर सकता हूं। अगर ठंडी हवा नहीं होती तो मैं रॉटरडैम में भी लगभग 2:10:00 में दौड़ सकता था। इसलिए मैं अपने अभी के राष्ट्रीय रिकॉर्ड से भी तेज दौड़ सकता हूं। ’’

बरवाल ने कहा, ‘‘अगले साल एशियाई मैराथन चैंपियनशिप है। फिर मैं 2028 ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहूंगा। ’’

बरवाल की अगले महीने शादी हो रही है। उन्होंने अपनी पहली रेस में ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें यह कामयाबी हासिल करने का भरोसा था क्योंकि वह जनवरी से ही रेस की तैयारी कर रहे थे।

उन्हें पिछले साल दिसंबर में वालेंसिया मैराथन में दौड़ना था, लेकिन चोट लगने की वजह से वह इसमें हिस्सा नहीं ले पाए।

बरवाल ने कहा, ‘‘मैं कुन्नूर में ऊंचाई के क्षेत्र में ट्रेनिंग कर रहा था और मैं अच्छी तैयारी कर रहा था। मुझे राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने का भरोसा था। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘लक्ष्य 2:10:00 के समय का था और 40 किमी तक सब कुछ योजना के मुताबिक ही हुआ। आखिरी दो किलोमीटर में दिक्कतें आईं। मुझे ठंडी हवा का अंदाजा नहीं था और ऊपर से मैंने अपने शरीर पर पानी भी डाला था। ’’

भाषा

नमिता सुधीर

सुधीर