… सुमन रे …
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने टाटा समूह से इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) से जमशेदपुर एफसी को हटाने के ‘चौंकाने वाले’ फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। टाटा समूह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जमशेदपुर एफसी को आईएसएल से हटाने का फैसला लंबे समय से बनाई गई रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि वह अब अपने मूल उद्देश्य, यानी जमीनी स्तर पर फुटबॉल के विकास पर फिर से पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहती है। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट सेवा) डी बी सुंदर रामम ने भी कहा है कि इस फैसले का आईएसएल के व्यावसायिक भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता से कोई संबंध नहीं है और इस पर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा। चौबे ने हालांकि उम्मीद जताई कि टाटा समूह अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा। चौबे ने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘एआईएफएफ चाहता है कि टाटा फुटबॉल से जुड़ा रहे, खासकर शीर्ष स्तर की सीनियर फुटबॉल में उनकी मौजूदगी बनी रही। एआईएफएफ की अपील से अगर उनके फैसले में बदलाव आ सकता है तो खिलाड़ियों और भारतीय फुटबॉल के हित में हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे शीर्ष लीग में बने रहें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एआईएफएफ उनके हर सुझाव का स्वागत करेगा और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उन्हें लागू करने के लिए तैयार है।’’ टाटा स्टील ने भरोसा दिलाया है कि जमशेदपुर एफसी अपने सभी खिलाड़ियों के मौजूदा अनुबंधों का सम्मान करेगा और उन्हें नए क्लब तलाशने में भी मदद करेगा। एआईएफएफ अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें टाटा समूह पर पूरा भरोसा है और उनका मानना है कि यह फैसला केवल व्यावसायिक कारणों से नहीं लिया गया होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह निदेशक मंडल किसी और मुद्दे के कारण यह निर्णय लिया है। इसके पीछे जरूर कोई ठोस वजह रही होगी। यह 1.1 करोड़ रुपये की भागीदारी या प्रबंधन शुल्क का मामला नहीं हो सकता। जब बोर्ड ने शीर्ष लीग से सीनियर टीम हटाने का फैसला लिया होगा तो उसके पीछे कोई मजबूत कारण जरूर रहा होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ टाटा समूह फुटबॉल प्रेमियों की भावनाओं से वाकिफ है, लेकिन मेरा मानना है कि यह केवल आर्थिक फैसला नहीं हो सकता क्योंकि टाटा समूह के कई बड़े उद्योग और कारोबार हैं।’’ चौबे ने कहा कि भारतीय खेलों में टाटा समूह के योगदान के कारण उनके मन में काफी सम्मान है। टाटा फुटबॉल अकादमी 1987 से संचालित है और उन्होंने भी यहां अभ्यास किया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने फुटबॉल की बारीकियां टाटा फुटबॉल अकादमी से ही सीखीं। 1987 से अब तक करीब 275 से अधिक खिलाड़ी यहां से निकल चुके हैं। मैं भी उनमें से एक हूं और शायद रेनेडी सिंह तथा मैंने इस अकादमी में सबसे लंबा समय बिताया है।’’ भाषा आनन्द मोनामोना