नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने रविवार को कहा कि उन्होंने कभी खुद पर विश्वास करना नहीं छोड़ा और जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीतने से उनका यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह जीत लंबे इंतजार के बाद मिली है और आगामी विश्व चैंपियनशिप से पहले उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा देगी।
सिंधू ने जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से सीधे गेमों में हराकर दो वर्षों बाद अपना पहला बड़ा खिताब जीता। इसके साथ ही वह जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बन गईं।
भारतीय बैडमिंटन संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन बातचीत में सिंधू ने कहा, ‘‘ मुझे इस जीत का लंबे समय से इंतजार था और मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण भी है। इस जीत ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया है। इससे मुझे विश्वास मिला है कि मैं आगे भी बड़ी सफलताएं हासिल कर सकती हूं और मेरा सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। विश्व चैंपियनशिप से पहले यह जीत मिलना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है।’’
सिंधू ने आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा खुद पर भरोसा बनाए रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग बहुत-सी बातें कहते हैं, लेकिन उनका जवाब देने के बजाय मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि मुझे खुद पर पूरा विश्वास है। काफी समय बाद यह खिताब मिला है और यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।’’
उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले लगभग दो वर्षों में छोटी-बड़ी चोटों और फिटनेस संबंधी समस्याओं के कारण उनका सफर आसान नहीं रहा।
अनुभवी भारतीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘एक खिलाड़ी के जीवन में चोट लगना सामान्य बात है। महत्वपूर्ण यह है कि आप उससे मजबूत होकर लौटें। मुझे कई बार चोट लगी, वापसी करनी पड़ी और फिर दोबारा चोट का सामना करना पड़ा। ऐसे में अपनी पुरानी लय हासिल करना आसान नहीं था।’’
सिंधू ने अपनी सफलता का श्रेय अपने सहयोगी स्टाफ और कोचों को देते हुए कहा कि सभी ने मिलकर कड़ी मेहनत की।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सहयोगी स्टाफ और कोच ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की और मुझे खुशी है कि मैं उनके प्रयासों को जीत में बदल सकी।’’
उन्होंने बताया कि जापान ओपन के फाइनल में उन्हें पता था कि यामागुची के खिलाफ लंबे समय तक रैलियां खेलनी पड़ेंगी।
सिंधू ने कहा, ‘‘उनके खिलाफ हर अंक महत्वपूर्ण होता है। आप अगर थोड़ी भी ढिलाई बरतते हैं तो आपकी लय टूट सकती है, इसलिए पूरे मैच के दौरान सतर्क रहना जरूरी था।’’
सिंधू ने अपने इंडोनेशिया के अपने कोच इरवानश्याह आदि प्रतामा की भी सराहना करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने हमेशा मुझ पर विश्वास जताया और कहा कि सही दिशा में मेहनत जारी रखो, नतीजे जरूर मिलेंगे। हमने अनुशासन के साथ तैयारी की और खुद पर भरोसा बनाए रखा। अभ्यास सत्र में सब कुछ सही चल रहा था और हमें विश्वास था कि सफलता मिलेगी।’’
बैडमिंटन में जनवरी 2027 से लागू होने वाली 15 अंकों की नई स्कोरिंग प्रणाली पर सिंधू ने कहा कि इससे मुकाबलों की गति और तीव्रता दोनों बढ़ जाएंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैच पहले से अधिक तेज और रोमांचक होंगे। 21 अंकों की प्रणाली में आप अगर पांच-छह अंक पीछे भी हों तो वापसी का समय रहता है, लेकिन 15 अंकों की प्रणाली में शुरुआत से ही पूरी तरह सतर्क रहना होगा। सात अंक के बाद आधा खेल समाप्त हो जाएगा, इसलिए पहले ही अंक से हर अंक के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। यह खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद रोमांचक भी होगा।’’
भाषा
आनन्द मोना
मोना