(Mobile Charging Electricity Consumption/ Image Credit: AI-generated)
Mobile Charging Electricity Consumption: आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग फोन का इस्तेमाल करते हैं। ज्यादा इस्तेमाल के कारण बैटरी जल्द खत्म होना (Mobile Charging Electricity Consumption) भी आम बात है। इसलिए ज्यादातर लोग दिन में एक या दो बार मोबाइल चार्ज करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना फोन चार्ज करने से कितनी बिजली खर्च होती है और इसका असर बिजली के बिल पर कितना पड़ता है?
मोबाइल चार्ज करने में बिजली की खपत कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें फोन की बैटरी क्षमता, चार्जर की पावर और चार्जिंग का समय सबसे अहम होता है। सामान्य तौर पर एक स्मार्टफोन को रोज एक बार फुल चार्ज करने पर बिजली की खपत (Mobile Charging Electricity Consumption) काफी कम होती है। औसतन एक महीने में मोबाइल चार्ज करने पर करीब 0.15 kWh (यूनिट) बिजली खर्च हो सकती है। वहीं बड़ी बैटरी वाले फोन में यह खपत थोड़ी ज्यादा हो सकती है।
अगर आप 5 वॉट के सामान्य चार्जर का इस्तेमाल करते हैं तो यह करीब एक घंटे में 0.005 kWh बिजली खर्च करता है। अगर किसी फोन को पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 3 घंटे लगते हैं तो पूरी चार्जिंग में करीब 0.015 kWh बिजली की खपत होती है। यानी एक बार फोन चार्ज करने में बिजली की मात्रा बहुत कम होती है और इसका सीधा असर बिल पर ज्यादा नहीं पड़ता।
अगर कोई व्यक्ति रोजाना एक बार फोन चार्ज करता है तो 5 वॉट चार्जर से सालभर में करीब 1.83 kWh यूनिट बिजली खर्च हो सकती है। वहीं ज्यादा पावर वाले चार्जर में खपत बढ़ जाती है। 10 वॉट चार्जर से लगभग 3.65 kWh, 15 वॉट चार्जर से करीब 5.48 kWh और 20 वॉट फास्ट चार्जर से लगभग 7.30 kWh तक सालाना बिजली खर्च हो सकती है।
मोबाइल चार्जिंग का खर्च बिजली की प्रति यूनिट कीमत पर निर्भर करता है। अगर बिजली की कीमत करीब 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए और सालभर में फोन लगभग 5 यूनिट बिजली खर्च (Mobile Charging Electricity Consumption) करे तो कुल खर्च करीब 40 रुपये सालाना होगा। यानी महीने का खर्च लगभग 3 से 4 रुपये के आसपास ही रहता है। इससे साफ है कि मोबाइल चार्ज करने से बिजली बिल पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ता। लेकिन सही चार्जर और जरूरत के हिसाब से चार्जिंग करना बेहतर रहता है।