वनडे विश्व कप के नए प्रारूप पर बवाल, एसोसिएट देशों और डब्ल्यूसीए ने आईसीसी की आलोचना की

वनडे विश्व कप के नए प्रारूप पर बवाल, एसोसिएट देशों और डब्ल्यूसीए ने आईसीसी की आलोचना की

वनडे विश्व कप के नए प्रारूप पर बवाल, एसोसिएट देशों और डब्ल्यूसीए ने आईसीसी की आलोचना की
Modified Date: July 18, 2026 / 04:47 pm IST
Published Date: July 18, 2026 4:47 pm IST

दुबई, 18 जुलाई (भाषा) अगले साल होने वाले आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के प्रारूप में किए गए बदलावों को लेकर एसोसिएट देशों और विश्व खिलाड़ी संघ (डब्ल्यूसीए) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह फैसला पहले उपलब्ध कराए गए अवसरों की मूल प्रकृति को ही बदल देता है।

आईसीसी ने 2027 वनडे विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 14 ही बरकरार रखी है। यह फैसला 2021 में लिया गया था जबकि 2019 और 2023 के विश्व कप में केवल 10-10 टीमें शामिल थीं। हालांकि, अब टूर्नामेंट के प्रारूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले 2027 वनडे विश्व कप में अब 12वीं, 13वीं और 14वीं रैंकिंग वाली टीमों के बीच ‘सुपर सीरीज’ खेली जाएगी। इसमें शीर्ष पर रहने वाली टीम ही अगले चरण में पहुंचेगी।

दूसरे राउंड में कुल 12 टीमें दो ग्रुप (प्रत्येक में छह टीम) में खेलेंगी। इस चरण में 30 मुकाबले होंगे। दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें और दोनों ग्रुप में चौथे स्थान पर रहने वाली टीम में से बेहतर प्रदर्शन करने वाली एक टीम ‘सुपर-7’ चरण में पहुंचेगी।

सुपर-7 चरण में 21 मैच खेले जाएंगे। इसके बाद शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी, जहां पहले स्थान की टीम चौथे स्थान की टीम से और दूसरे स्थान की टीम तीसरे स्थान की टीम से भिड़ेगी।

700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करने वाली डब्ल्यूसीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि आईसीसी के इस फैसले से पारदर्शिता, परामर्श प्रक्रिया और क्रिकेट के वैश्विक विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उसने कहा कि इतने बड़े बदलावों से पहले खिलाड़ियों और अन्य संबंधित पक्षों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

संस्था ने कहा, ‘‘खेल की संरचना और उसके सबसे बड़े टूर्नामेंटों में किसी भी बड़े बदलाव के साथ स्पष्ट संवाद, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और खिलाड़ियों व अन्य हितधारकों के लिए पर्याप्त स्पष्टता होनी चाहिए। ’’

एसोसिएट देशों के कप्तानों ने भी इस पर नाराजगी जताई। नामीबिया, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड के कप्तानों ने भी डब्ल्यूसीए के बयान का समर्थन किया।

नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने कहा, ‘‘कई देशों के खिलाड़ियों के लिए वनडे विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उनके करियर का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। हम मानते हैं कि विश्व कप में जगह प्रदर्शन के आधार पर मिलनी चाहिए, लेकिन क्वालीफिकेशन ऐसा होना चाहिए जिससे सबसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करने का वास्तविक अवसर मिले। एसोसिएट देशों को लंबे समय से सीमित मौके मिलते रहे हैं। ’’

नीदरलैंड के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा, ‘‘आईसीसी वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार की बात करता है, लेकिन ऐसे फैसले एसोसिएट देशों के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ खेलने के अवसर और कम कर देते हैं। यही मौके टीम को बेहतर बनाते हैं और अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। अगर क्रिकेट को सचमुच वैश्विक खेल बनाना है तो अवसर बढ़ाने चाहिए, घटाने नहीं।’’

स्कॉटलैंड के कप्तान रिची बेरिंगटन ने कहा कि खिलाड़ियों के करियर को प्रभावित करने वाले फैसलों पर उनसे चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ी हर फैसला खुद नहीं लेना चाहते, लेकिन खेल और खिलाड़ियों के करियर पर बड़ा असर डालने वाले निर्णयों में उनकी सार्थक भागीदारी होनी चाहिए। अलग-अलग पक्षों की राय से बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं और अब समय आ गया है कि ऐसा वास्तव में किया जाए। ’’

वहीं न्यूजीलैंड के शीर्ष वनडे बल्लेबाज डेरिल मिचेल ने भी खिलाड़ियों और देशों के लिए समान अवसरों की वकालत करते हुए कहा, ‘‘हम पूरी तरह से इस बात के पक्ष में हैं कि दुनिया भर के खिलाड़ियों और देशों को क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचने और वहां प्रतिस्पर्धा करने के लिए लगातार और निष्पक्ष अवसर मिलें। ’’

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द


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