(हिमांक नेगी)
नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) एक वह भी दौर था जब हशमतुल्लाह शाहिदी को बल्लेबाजी या मोहम्मद नबी को स्पिन गेंदबाजी करते देख दाउद अहमदजई मन मसोसकर रह जाते थे कि आखिर वह अफगानिस्तान क्रिकेट टीम में क्यो नहीं हैं ।
अंडर 19 स्तर पर शाहिदी, नबी, गुलबदिन नायब या नजीबुल्लाह जदरान के साथ खेल चुके दाउद अक्सर खुद से पूछते थे कि क्या उनके भीतर क्रिकेट बची भी है या नहीं ।
बत्तीस वर्ष के इस क्रिकेटर ने पीटीआई से कहा ,‘‘ कई बार टीवी पर उन्हें देखकर मैं रोता था । मैं उनके साथ खेल चुका था । कई बार लगता था कि मेरे सफर को क्या हो गया है और मैं क्या अलग कर सकता था ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं अफगानिस्तान की जर्सी पहनना चाहता था । ये खिलाड़ी मेरे दोस्त और साथी थे जिनके साथ मैने काफी क्रिकेट खेली है लेकिन जिंदगी मुझे कहीं और ले गई ।’’
लेग स्पिनर दाउद ने फ्रांस में शरण ली लेकिन यह सफर उतना आसान भी नहीं था ।
अफगानिस्तान छोड़ने के बाद उन्हें यूरोप में शून्य से शुरूआत करनी पड़ी । वह क्लब क्रिकेट खेलने के लिये 11 घंटे बस में सफर करके पेरिस से एम्सटर्डम आते थे क्योंकि ट्रेन टिकट महंगे थे । पौष्टिक और भरपेट खाना मिलना तो कई बार दूभर हो जाता था ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैच खेलने के लिये 11 घंटे जाना और 11 घंटे लौटने का सफर तय करता था । लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि कठिन समय निकल जायेगा । मैने कभी क्रिकेट छोड़ने के बारे में नहीं सोचा ।’’
हाल ही में वह फ्रांस के लिये 50 से ज्यादा टी20 विकेट लेने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं फ्रांस को विश्व कप में देखना चाहता हूं । इटली ने साबित कर दिया कि यूरोपीय टीमें भी कर सकती है । उम्मीद है कि फ्रांस भी विश्व कप खेलेगा ।’’
यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग में एक्सेल युनाइटेड ब्रसेल्स के लिये खेलने जा रहे दाउद को मुख्य कोच मार्क बाउचर के मार्गदर्शन में खेलने का मौका मिलेगा ।
उन्होंने कहा ,‘‘ आईपीएल ने दिखा दिया कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट से क्या हो सकता है । एसए20 ने दक्षिण अफ्रीका में वही किया है । इन टूर्नामेंटों से खिलाड़ियों को सीखने और बेहतर खेलने में मदद मिलती है ।’’
भाषा मोना पंत
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