(ITR Filing 2026/ Image Credit: Meta AI)
नई दिल्ली: ITR Filing 2026: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय शुरू हो गया है। नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और अन्य टैक्सपेयर्स को तय समय सीमा के अंदर अपना रिटर्न फाइल करना जरूरी है। नौकरीपेशा और HUF करदाताओं के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है। जबकि बिना ऑडिट वाले व्यापारियों को अब 31 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया है।
जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट जरूरी होता है उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है। वहीं ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स को 30 नवंबर 2026 तक का समय मिलता है। अगर कोई व्यक्ति तय समय पर रिटर्न नहीं भर पाता है तो वह 31 दिसंबर 2026 तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ दाखिल कर सकता है। रिटर्न में सुधार के लिए ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ की अंतिम तारीख 31 मार्च 2027 है।
अगर कोई टैक्सपेयर समय पर ITR फाइल नहीं करता है तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। सेक्शन 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है। जबकि 5 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए यह जुर्माना 1,000 रुपये तक सीमित है। इसके अलावा बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना होता है। देर से फाइलिंग करने पर रिफंड मिलने में भी देरी होती है और कुछ टैक्स बेनिफिट्स का नुकसान भी हो सकता है।
समय पर ITR फाइल करना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए एक मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड भी बनाता है। इससे टैक्स रिफंड जल्दी मिलता है और बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड या अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए आवेदन आसान हो जाता है। वीजा प्रोसेस में भी ITR एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। समय पर फाइलिंग से टैक्स नोटिस और पेनाल्टी का जोखिम भी खत्म हो जाता है।
ITR भरते समय सही फॉर्म का चयन करना बहुत जरूरी है। आय के सभी स्रोतों की सही जानकारी दें और फॉर्म 26AS तथा AIS डेटा को ध्यान से मिलान करें। प्री-फिल्ड डेटा को बैंक स्टेटमेंट से जरूर चेक करें। केवल वैध दस्तावेजों के आधार पर ही टैक्स छूट का दावा करें। रिटर्न सबमिट करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। इसके बिना इसके रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।