नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ के निदेशक आनंद वर्मा ने आरोप लगाया कि वैध टिकट धारकों को अरूण जेटली स्टेडियम पर आईपीएल मैचों के दौरान ‘अनधिकृत व्यक्ति’ प्रवेश से रोक रहे हैं जिन्होंने धोखेबाजी से नकली टिकट हासिल किये हैं जबकि डीडीसीए के आला अधिकारियों ने इस आरोप का खंडन किया है ।
पुलिस उपायुक्त (मध्य जिला ) से की गई शिकायत में वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके मेहमानों को चार अप्रैल को मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच मैच के दौरान स्टेडियम के हॉस्पिटेलिटी हिस्से में प्रवेश नहीं करने दिया गया जबकि उनके पास वैध टिकट थे ।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें दिये गए टिकट का इस्तेमाल ‘अनधिकृत व्यक्तियों’ द्वारा पहले ही किया जा चुका था ।
डीडीसीए सचिव अशोक शर्मा ने हालांकि इसे तकनीकी मसला बताया ।
वर्मा ने कहा ,‘‘वादी और उनके मेहमान जब प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो उन्हें अवैध तरीके से रोक दिया गया और वहां खड़े सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘जांच के बाद पता चला कि उनके पास मौजूदा दो मानार्थ टिकट पहले ही स्कैन हो चुके थे और अनधिकृत तथा अज्ञात व्यक्तियों ने उनका प्रयोग कर लिया था ।’’
वर्मा ने कहा कि इस धोखेबाजी का पता चलते ही उन्होंने डीडीसीए के मुख्य वित्त अधिकारी मनन गुप्ता से संपर्क किया और टिकटों के अवैध दुरूपयोग की बात कही । वर्मा ने कहा कि उन्होंने डीडीसीए अध्यक्ष रोहन जेटली के समक्ष भी यह मामला रखा ।
उन्होंने कहा ,‘‘ त्वरित कार्रवाई करने की बजाय मनन गुप्ता ने उन्हें भूषण नामक व्यक्ति का नंबर दिया जो डीडीसीए में टिकटों के प्रभारी है । लेकिन उन्होंने भी इसका कोई स्पष्ट और संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया ।’’
अशोक शर्मा ने कहा कि टिकटों का बारकोड तकनीकी खामी के कारण स्कैनर पढ नहीं सका ।
उन्होंने कहा ,‘‘ दिल्ली कैपिटल्स ने हमें बताया कि कोई तकनीकी मामला था । कई बार स्कैनर बारकोड नहीं पढ पाता ।’’
वर्मा ने कहा ,‘‘ मानार्थ टिकटों का दुरूपयोग विश्वास का हनन है और सुरक्षा संबंधी खतरे का भी मामला है ।सुरक्षाकर्मियों का इसमें शामिल होना चिंता का विषय है ।’’
दिल्ली में अभी आईपीएल के पांच मैच और होने हैं ।
भाषा मोना सुधीर
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