राष्ट्रमंडल पदक के साथ सिर्फ सरकारी नौकरी का लक्ष्य नहीं रखें, अगली पीढ़ी को प्रेरित करें: मांडविया

राष्ट्रमंडल पदक के साथ सिर्फ सरकारी नौकरी का लक्ष्य नहीं रखें, अगली पीढ़ी को प्रेरित करें: मांडविया

राष्ट्रमंडल पदक के साथ सिर्फ सरकारी नौकरी का लक्ष्य नहीं रखें, अगली पीढ़ी को प्रेरित करें: मांडविया
Modified Date: August 4, 2026 / 07:18 pm IST
Published Date: August 4, 2026 7:18 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया और कहा कि इस प्रतियोगिता में पोडियम तक पहुंचना सिर्फ सरकारी नौकरी पाने का जरिया नहीं होना चाहिए।

पदक विजेताओं को स्वर्ण के लिए 30 लाख रुपये, रजत के लिए 20 लाख रुपये और कांस्य के लिए 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिए गए।

खेल मंत्रालय के एक बयान में मांडविया के हवाले से कहा गया, ‘‘आइए, सिर्फ सरकारी नौकरी पाने के मकसद से राष्ट्रमंडल खेलों का पदक नहीं जीते। मैं आप सभी से अपील करता हूं कि अपने सक्रिय करियर से संन्यास के बाद खेल अकादमियां संचालित कीजिए।’’

उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों जैसी बहु खेल प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिलने के पिछले उदाहरणों का जिक्र किया।

चैंपियनों को बधाई देते हुए मांडविया ने उनसे आग्रह किया कि वे खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन और प्रेरित करके अपने प्रतिस्पर्धी करियर के बाद भी भारतीय खेलों में अपना योगदान दें।

सम्मान समारोह में भारतीय मुक्केबाजी दल के सदस्य भी शामिल हुए जिसने 10 पदक (सात स्वर्ण और तीन रजत) के शानदार प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया।

प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते।

तीन रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ी जादुमणि सिंह (55 किग्रा), ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90 किग्रा से अधिक) रहे।

मांडविया ने जूडो दल को भी सम्मानित किया जिसने चार पदक (दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक सहित) जीतकर इन खेलों में भारत का अब तक का सबसे अच्छा अभियान पूरा किया। ग्लास्गो में भारत ने जूडो की 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीत। भारत ने बर्मिंघम में हुए 2022 खेलों में तीन पदक जीते थे जिनमें कोई स्वर्ण पदक नहीं था।

अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत के लिए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीते।

जापान में सितंबर-अक्टूबर में होने वाले एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए मांडविया ने खिलाड़ियों से कहा कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में बनी अपनी लय को बरकरार रखें।

खेल मंत्री ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि आप सभी इस बढ़े हुए हौसले का इस्तेमाल 2026 के एशियाई खेलों में और स्वर्ण पदक जीतने के लिए करें। जिन लोगों ने रजत और कांस्य पदक जीते हैं, उन्हें स्वर्ण के लिए कोशिश करनी चाहिए और जिन्होंने स्वर्ण जीता है, उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन का स्तर बनाए रखना चाहिए।’’

उन्होंने खिलाड़ियों से यह भी कहा कि वे अपने कोच के योगदान को कभी नहीं भूलें।

मांडविया ने कहा, ‘‘आप में से किसी को भी अपने कोच के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। गुरु का मार्गदर्शन जीवन में आपको बहुत आगे ले जाता है।’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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