हाशिये से लेकर मुख्य भूमिका तक: भारत का डेविस कप का नया नायक दक्षिणेश्वर सुरेश

हाशिये से लेकर मुख्य भूमिका तक: भारत का डेविस कप का नया नायक दक्षिणेश्वर सुरेश

हाशिये से लेकर मुख्य भूमिका तक: भारत का डेविस कप का नया नायक दक्षिणेश्वर सुरेश
Modified Date: February 10, 2026 / 10:40 am IST
Published Date: February 10, 2026 10:40 am IST

(अमनप्रीत सिंह)

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) दिखावे के प्रति जुनूनी इस युग में कड़े अनुशासन और वर्षों की अथक मेहनत से अपने करियर को नए मुकाम पर पहुंचाने वाले भारतीय डेविस कप टीम के नए नायक दक्षिणेश्वर सुरेश का उदय व्यवस्थित तरीके से हुआ है।

दक्षिणेश्वर का भारतीय टेनिस में हाशिए से मुख्य भूमिका में पहुंचने तक का सफर चकाचौंध से दूर रहा और इस बीच वह धैर्यपूर्वक चुपचाप आगे बढ़ते रहे।

टेनिस से उनका जुड़ाव पारिवारिक संबंधों से है। उनके पिता सुरेश एक्का डिंडीगुल के क्लब स्तर के खिलाड़ी थे। उनके इन्हीं शुरुआती संपर्कों के कारण दक्षिणेश्वर के लिए चेन्नई में लक्ष्मण चक्रवर्ती के रूप में कोच ढूंढने में मदद मिली।

उन शुरुआती दिनों से ही कड़ी मेहनत जारी रही। इस दौरान 2010 और 2016 के बीच दक्षिणेश्वर चेन्नई में प्रतिदिन लगभग 16 किलोमीटर की यात्रा बस से करते थे।

चक्रवर्ती ने पीटीआई को अपने शिष्य के शुरुआती संघर्षों के बारे में बताते हुए कहा, ‘‘तब वह सिर्फ नौ साल का था। उसमें किसी तरह का अहं का भाव नहीं था। उसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं था। उसे सुरपेट से मोगाप्पैर, फिर मोगाप्पैर से अन्ना नगर और अन्ना नगर से लोयोला कॉलेज, नुंगमबक्का जाना पड़ता था। मैं उसे बस स्टैंड से लेने जाता था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सुबह का समय अन्ना नगर में फिटनेस ट्रेनर रंजीत के साथ बीतता था। उसके बाद लोयोला कॉलेज में टेनिस के सत्र होते थे।’’

चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘वह सबके साथ खेलता था और कड़ी मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटता था। वह बहुत शांत स्वभाव का है और उसका रवैया अलग है। उसने कई वर्ष तक पेप्सी या कोक नहीं पी। वह बेहद अनुशासित है।’’

पैसा अक्सर एक समस्या होती थी। अवसर सीमित थे। दक्षिणेश्वर 2016 में प्रशिक्षण के लिए फ्रांस गए और उसी वर्ष बाद में उन्होंने डीएलटीए में अंडर-16 फेनेस्टा ओपन राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती जो उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई।

चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘अगर उसे पहले ही प्रायोजक मिल गए होते तो हालात काफी अलग हो सकते थे। वह अलग ही स्तर पर खेल रहा है।’’

दक्षिणेश्वर को 2019 में पीठ की चोट के कारण पांच से छह महीने तक खेल से दूर रहना पड़ा। उसके बाद कोविड-19 महामारी ने प्रतिस्पर्धा और प्रायोजन को पूरी तरह से ठप कर दिया।

विकल्प सीमित होते देख पूर्व भारतीय खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने उन्हें अमेरिका जाने की सलाह दी। यह एक ऐसा फैसला था जिसने दक्षिणेश्वर के करियर को नहीं दिशा प्रदान की।

चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘हमारे पास पैसों की कमी थी, इसलिए हमने सोमदेव की सलाह पर उसे अमेरिका भेज दिया। छात्रवृत्ति से मदद मिली। वहां उसने बहुत सुधार किया। कॉलेज टेनिस में लगातार मैच खेलना, टीम प्रतियोगिता का दबाव और पेशेवर माहौल ने उसे मजबूत बनाया। इससे वह मानसिक रूप से भी मजबूत बना।’’

अब उनकी यह मानसिक दृढ़ता डेविस कप के मंच पर दिखाई दे रही है। बेंगलुरु में नीदरलैंड के खिलाफ भारत के हालिया डेविस कप मुकाबले में दक्षिणेश्वर ने दबाव में भी संयमित और निडर प्रदर्शन करते हुए टीम को उस समय संभाला जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्होंने भारत की 3-2 की करीबी जीत में अपने तीनों मैच जीते।

वह मई में वेक फॉरेस्ट विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई पूरी कर लेंगे।

चक्रवर्ती दक्षिणेश्वर को अपना सबसे अच्छा शिष्य कहते हैं।

उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा, ‘‘वह मेरा सबसे अच्छा शिष्य है। वह सब कुछ व्यवस्थित रखता है। कपड़े, जूते, किट बैग। वह हमेशा चीजों को एक ही जगह पर रखता है। उसकी टोपी, रैकेट, सब कुछ हमेशा एक ही जगह पर रखा रहता है। वह बहुत ही व्यवस्थित है। यही उसकी खूबी है। छोटी-छोटी चीजें ही फर्क पैदा करती हैं।’’

कोच का मानना ​​था कि दक्षिणेश्वर के करियर को लेकर अगला कदम जल्द ही उठाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘उसे और अधिक यात्रा करनी चाहिए और और अधिक प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहिए। वह छह महीने में शीर्ष 100 में जगह बना सकता है। उसे वाइल्ड कार्ड मिलना चाहिए। अधिक टूर्नामेंट खेलना ही सफलता की कुंजी है।’’

भाषा

पंत

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