ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल: व्हीलचेयर बास्केटबॉल में भारत की नजर ऐतिहासिक पदक पर
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल: व्हीलचेयर बास्केटबॉल में भारत की नजर ऐतिहासिक पदक पर
… फिलेम दीपक सिंह …
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) अदम्य साहस और संघर्ष की मिसाल दो भारतीय महिला खिलाड़ी ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए ‘3 गुणा 3’ व्हीलचेयर बास्केटबॉल में पदक जीतकर इतिहास रचने की तैयारी में हैं, जो अब तक कोई भारतीय नहीं कर सका है। इसमें महाराष्ट्र की मीनाक्षी जाधव एक पेड़ से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट का शिकार हुईं, जबकि मणिपुर की रितु चानू का बचपन में बस दुर्घटना के बाद दायां पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। टीम की अन्य दो सदस्य महाराष्ट्र की रीना गुप्ता और कर्नाटक की लक्ष्मी रायन्नावर हैं। ‘3 गुणा 3’ व्हीलचेयर बास्केटबॉल स्पर्धा की शुरुआत 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में हुई थी। इस प्रारूप में एक समय में तीन खिलाड़ी कोर्ट पर खेलते हैं, जबकि एक खिलाड़ी स्थानापन्न के रूप में उपलब्ध रहता है। मुकाबले की अवधि 10 मिनट होती है। भारतीय टीम ने 2025 में बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित ‘इंटरनेशनल व्हीलचेयर बास्केटबॉल फेडरेशन (आईडब्ल्यूबीएफ)’ एशिया-ओशिनिया चैम्पियनशिप के जरिए राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई किया। टीम की कप्तान मीनाक्षी ने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा, ‘‘मैं महाराष्ट्र के एक गांव में सामान्य जीवन जी रही थी। वर्ष 2012 में, जब मेरी उम्र 23 वर्ष थी, तब मैं पेड़ से गिर गई और मेरी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग गई। शुरुआत में मुझे इसका अंदाजा नहीं था, लेकिन बाद में नाभि के नीचे मेरा शरीर सुन्न पड़ गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में केवल शरीर का ऊपरी हिस्सा ही काम कर रहा था। समय के साथ स्थिति और गंभीर हो गई और उन्हें कुछ समय तक आईसीयू में भी रहना पड़ा। इसके बाद मीनाक्षी अपने सतारा जिले के गांव से मुंबई चली गईं, जहां उन्होंने एक पुनर्वास केंद्र में इलाज और थेरेपी कराई। इसी दौरान उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की। उन्होंने कहा, ‘‘2017 में मैंने हैदराबाद में अपनी पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेली। यह बेहद कठिन अनुभव था। व्हीलचेयर संभालने से लेकर खेल तक, हर चीज के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी।’’ मुंबई के पुनर्वास केंद्र में ही मीनाक्षी की मुलाकात पूर्व भारतीय खिलाड़ियों, कोचों और अन्य व्हीलचेयर खिलाड़ियों से हुई। यहीं से उन्हें इस खेल की जानकारी मिली और उन्होंने व्हीलचेयर बास्केटबॉल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। मीनाक्षी ने कहा, ‘‘वहां के सामाजिक कार्यकर्ता भी खिलाड़ी थे। मुझे सभी का भरपूर सहयोग मिला। पुनर्वास केंद्र ने प्रायोजन दिलाने में मदद की और व्हीलचेयर बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी हर जरूरत पर हमारा साथ दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ पहले भारतीय टीम ‘5 गुणा 5’ प्रारूप में खेलती थी, लेकिन अब पहली बार ‘3 गुणा 3’ स्पर्धा में हिस्सा लेने का अवसर मिला है। हम ग्लासगो में पदक जीतकर खुद को साबित करना चाहते हैं। यही हमारा लक्ष्य है और हम देश को गौरवान्वित करना चाहते हैं।’’ मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के नामबोल स्थित इरेंगबाम गांव की रहने वाली रितु चानू का जीवन भी बचपन में एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया। महज छह-सात वर्ष की उम्र में वह पीछे की ओर आ रही एक बस की चपेट में आ गई थीं, जिसके कारण उनका दायां पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। रितु ने कहा, ‘‘मैंने तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और पिछले वर्ष थाईलैंड में आयोजित क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में भी खेली थी।’’ वह इम्फाल के खुमान लंपाक खेल परिसर में प्रशिक्षण लेती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की है और घर पर बुनाई का काम करके अतिरिक्त आय अर्जित करती हैं। आर्थिक सहयोग के बारे में पूछे जाने पर रितु ने कहा, ‘‘मैं घर पर बुनाई करती हूं, जिससे कुछ आमदनी हो जाती है। राज्य सरकार से भी सहायता मिलती है और मेरी बड़ी बहन हमेशा मेरा साथ देती हैं।’’ भारतीय व्हीलचेयर बास्केटबॉल महासंघ (डब्ल्यूबीएफआई) के अध्यक्ष वरुण आहलावत ने कहा कि टीम ने ग्वालियर में बेहतर तैयारी की है और पहली ही बार राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार है जब हमने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। हमारा लक्ष्य पहले ही प्रयास में पदक जीतना है। ‘3 गुणा 3’ व्हीलचेयर बास्केटबॉल स्पर्धा का आगाज 24 जुलाई से होगा। भाषा आनन्द आनन्द

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