(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, 20 सितंबर (भाषा) चार साल तक अपने खर्च पर और खुद प्रशिक्षण लेकर तैयारी करने वाली क्विम्सी डिसूजा यही सपना लेकर एशियाई खेलों में पहुंची थीं कि देश टेकबॉल जैसे खेल के बारे में जाने।
महाद्वीपीय बहु खेल प्रतियोगिता में जिन दो स्पर्धाओं में उन्होंने हिस्सा लिया उनमें कम से कम एक कांस्य पदक जीतना उनके इस सपने को काफी हद तक पूरा कर देता। हालांकि क्विम्सी को लगता है कि उन्होंने भारत में अब तक लगभग अनजान इस खेल को ऊंचे स्तर तक ले जाने की दिशा में पहला कदम जरूर उठा दिया है।
सिर्फ पांच मिनट के अंतराल में लगातार दो मुकाबले खेलने के बावजूद 24 वर्षीय क्विम्सी रविवार को इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच गई थीं लेकिन उन्हें महिला एकल और मिश्रित युगल दोनों के कांस्य पदक मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।
महिला एकल के कांस्य पदक मुकाबले में उन्होंने जापान की दुनिया की सातवें नंबर की खिलाड़ी युइना सकामोटो को कड़ी टक्कर दी लेकिन 0-2 (11-12, 11-12) से हारकर पदक से चूक गईं।
महज पांच मिनट बाद वह उसी एरेना में मोहम्मद अनस बेग के साथ मिश्रित युगल में ऐतिहासिक पदक हासिल करने की एक और कोशिश के लिए उतरीं। हालांकि, उन्हें वियतनाम की होआंग मिन्ह तान गुयेन और जिया निघ त्रिन्ह की जोड़ी के खिलाफ 0-2 (9-12, 6-12) से हार झेलनी पड़ी।
क्विम्सी ने पीटीआई से कहा, ‘‘इसे स्वीकार करना मुश्किल है। नतीजे मेरी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। लेकिन मुझे पता है कि मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया। मैं चाहती थी कि भारत जाने कि टेकबॉल क्या है।’’
उन्होंने निराशा के आंसुओं को रोकने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘यह सफर अभी शुरू हुआ है। मेरा विश्वास कीजिए, मैं हार नहीं मानने वाली। हमने अभी शुरुआत की है और अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। पदक बहुत जल्द आएगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सही मार्गदर्शन मिले तो और भी लड़कियां इस खेल को खेल सकती हैं। कृपया इस खेल पर विश्वास कीजिए।’’
क्विम्सी ने कहा, ‘‘मैंने यह खेल उस समय शुरू किया था जब भारत में कोई नहीं जानता था कि टेकबॉल क्या होता है। पहली बार टेबल पर गेंद को छूते ही मुझे इस खेल से प्यार हो गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बचपन में मेरा हमेशा से सपना था कि सीने पर देश का बैज लगाकर भारत के लिए खेलूं। यह बहुत अच्छा खेल है। इसे खेलकर आपको आनंद आएगा।’’
भाषा सुधीर नमिता
नमिता