नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने एशियाई खेलों से बाहर होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन कहा कि इस झटके को ‘स्वीकार करना’ और जल्द वापसी पर ध्यान केंद्रित करना अहम है।
अठाईस वर्षीय चोपड़ा ने तोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को एथलेटिक्स में पहला ओलंपिक स्वर्ण दिलाया था। इसके बाद उन्होंने पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीता। हालांकि ट्रेनिंग के दौरान ‘लिगामेंट’ में चोट लगने के कारण वह लगातार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक की हैट्रिक बनाने का मौका गंवा बैठे।
यह चोट लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने के कुछ ही समय बाद लगी। इसके साथ ही उनका 2026 सत्र समय से पहले समाप्त हो गया और वह एशियाई खेलों के साथ डायमंड लीग फाइनल से बाहर हो गए।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के ‘खेलो भारत पॉडकास्ट’ में उन्होंने कहा, ‘‘यह निश्चित रूप से मुश्किल है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह आसान है। मेरे लिए यह थोड़ा सामान्य हो गया है क्योंकि मेरे करियर में ऐसा कई बार हुआ है। कई बार ऐसा हुआ जब मैं पूरी तरह तैयार था और अचानक चोट लग गई। ’’
चोपड़ा ने कहा कि इस बार की चोट इसलिए ज्यादा निराशाजनक थी क्योंकि उन्हें लगा था कि वह पहले की परेशानी से उबरकर आखिरकार अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में लौट आए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मुझे लगा कि मैं आखिरकार फिर से पुराने नीरज की तरह हो गया हूं तो वही उत्साह और निरंतरता वापस आ गई है और तभी मैंने 88 मीटर का थ्रो किया। फिर उसके ठीक एक दिन बाद ट्रेनिंग के दौरान दोबारा चोट लग गई। शुरुआती कुछ मिनट मेरे लिए बहुत मुश्किल थे। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा झोंक दिया था। मैंने साल की शुरुआत से ही ट्रेनिंग शुरू कर दिया था। मैंने अपने परिवार के साथ बिल्कुल भी समय नहीं बिताया था। मैंने अपना पूरा ध्यान ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं पर केंद्रित कर दिया था क्योंकि यह साल बहुत व्यस्त रहा। मैं बार-बार यही सोचता रहा कि इतनी मेहनत करने के बाद भी मैं आखिरकार वहीं वापस आ गया था, जहां साल की शुरुआत में था। ’’
जब उनसे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों के लिए संदेश के बारे में पूछा गया तो चोपड़ा ने उन्हें इस मौके का भरपूर लाभ उठाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे बस यही कहूंगा कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। आपको एशियाई खेलों जैसे बड़े खेल टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका हर चार साल में एक बार मिलता है इसलिए अपने मन में ऐसा कुछ लेकर वापस नहीं आएं कि बाद में आपको लगे, ‘मैं यह कर सकता था’। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगले चार साल तक इंतजार करने के बजाय खुद को अच्छी तरह मानसिक रूप से तैयार करें और वहां अपना शतक प्रतिशत दें, ताकि आपको यह संतुष्टि रहे कि आपने अपनी कड़ी मेहनत के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया। ’’
चोपड़ा ने कहा, ‘‘मेरी सभी को शुभकामनाएं हैं। मुझे उम्मीद है कि एशियाई खेलों में भारत का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहेगा और हर खिलाड़ी वह प्रदर्शन हासिल करेगा, जिसे वह लक्ष्य बनाकर चल रहा है। ’’
भाषा नमिता सुधीर
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