एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ी प्रदर्शन का स्तर और ऊंचा करेंगे : झाझड़िया
एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ी प्रदर्शन का स्तर और ऊंचा करेंगे : झाझड़िया
नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के अध्यक्ष देवेंद्र झाझड़िया ने जापान में होने वाले आगामी एशियाई पैरा खेलों में भारतीय दल से दमदार प्रदर्शन का भरोसा जताते हुए कहा कि खिलाड़ियों की तैयारियां सही दिशा में चल रही हैं और ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों तथा 2024 पेरिस पैरालंपिक खेलों में मिली सफलता से टीम का मनोबल भी ऊंचा है।
भारत ने 2023 में हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में रिकॉर्ड 111 पदक जीते थे, जिनमें 29 स्वर्ण शामिल थे। दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी झाझड़िया का मानना है कि अगले महीने होने वाले आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों में भारतीय दल इस उपलब्धि का स्तर और ऊंचा कर सकता है।
झाझड़िया ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले सात पैरा खिलाड़ियों के सम्मान में ‘एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस’ की ओर से आयोजित समारोह से इतर कहा, “आगामी एशियाई पैरा खेलों के लिए तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आइची-नागोया खेलों में भारतीय खिलाड़ी उसी तरह शानदार प्रदर्शन करेंगे, जैसा उन्होंने 2024 पेरिस पैरालंपिक और 2023 के ऐतिहासिक हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में किया था।’’
झाझड़िया ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पैरा खिलाड़ियों को मिल रहे तनावमुक्त माहौल का उनकी सफलता में प्रमुख योगदान रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास रहता है कि खिलाड़ियों को किसी तरह के तनाव में न रखा जाए। जब खिलाड़ियों को तनावमुक्त वातावरण मिलता है, तभी उनमें यह विश्वास पैदा होता है कि पैरालंपिक समिति और सरकार उनके लिए गंभीरता से काम कर रही हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वे प्रतियोगिता के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार थे।”
राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय पैरा खेलों का अगला लक्ष्य 2028 और 2032 के पैरालंपिक खेल हैं। झाझड़िया ने कहा कि इन दोनों खेलों को ध्यान में रखते हुए तैयारियां पूरी गंभीरता के साथ चल रही है।
झाझड़िया ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में पैरा खेलों की तस्वीर काफी बदली है। एक समय भारतीय पैरा खिलाड़ियों का वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन) बड़ी चुनौती हुआ करता था, लेकिन अब स्थिति काफी व्यवस्थित हो गई है। देश में कई अंतरराष्ट्रीय पैरा प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को वर्गीकरण की सुविधा देश में ही मिलने लगी है।
उन्होंने कहा, “पीसीआई का पहला लक्ष्य ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को भारत लाना था, जिनके जरिए भारतीय पैरा खिलाड़ियों का वर्गीकरण देश में ही कराया जा सके। एक समय ‘डिसएबिलिटी क्लासिफिकेशन’ बहुत बड़ी समस्या थी। अंतरराष्ट्रीय ग्रां प्री में वर्गीकरण के लिए हमें केवल तीन से पांच कोटे ही मिलते थे।’’
झाझड़िया ने बताया कि भारत में पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री शुरू की गई और इसके दो सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए, हमने एक ही ग्रां प्री में 120 खिलाड़ियों का वर्गीकरण किया। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।”
झाझड़िया ने बताया कि पीसीआई की ओर से जूनियर खिलाड़ियों के लिए भी विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 15-16 वर्ष की उम्र के बच्चों को उनके घर पर ही आवश्यक सुविधाएं, खेल उपकरण और किट उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसका उद्देश्य इन युवा खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाना है कि उनकी प्रतिभा और जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे सोच यह है कि आज 15-16 वर्ष की उम्र के ये खिलाड़ी आने वाले समय में 2028 या 2032 के पैरालंपिक खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
भाषा आनन्द पंत
पंत

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