आईपीएल 2026 समीक्षा: आरसीबी ने जीत की परंपरा कायम रखी, मुंबई इंडियंस और एलएसजी का भविष्य अनिश्चित
आईपीएल 2026 समीक्षा: आरसीबी ने जीत की परंपरा कायम रखी, मुंबई इंडियंस और एलएसजी का भविष्य अनिश्चित
(भरत शर्मा)
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने एक और बेहद सफल सत्र में शानदार प्रदर्शन किया, गुजरात टाइटन्स ने प्लेऑफ में पहुंचने की अपनी निरंतरता बनाए रखी लेकिन आईपीएल की बड़ी टीम मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) ने निराशाजनक प्रदर्शन के बाद 2026 सत्र के खत्म होने से पहले ही अगले सत्र के लिए बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी।
टी20 क्रिकेट में कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है और लीग की प्रकृति में यह बात साफ दिखी क्योंकि प्लेऑफ में जगह बनाने वाली टीम का फैसला लीग चरण के आखिरी दिन हुआ।
आरसीबी, गुजरात टाइटन्स और सनराइजर्स हैदराबाद लीग चरण के आखिरी दिन से पहले ही क्वालीफाई कर चुकी थीं, लेकिन राजस्थान रॉयल्स 24 मई को मुंबई इंडियंस को हराकर चौथी टीम के तौर पर प्लेऑफ में शामिल हो गई जिसने आखिरी दिन पंजाब किंग्स को बाहर कर दिया।
पीटीआई-भाषा लीग की 10 टीम के प्रदर्शन पर अंक तालिका में स्थान के आधार पर नजर डाल रहा है।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु:
18 साल से आईपीएल खिताब का इंतजार कर रही इस फ्रेंचाइजी ने पिछले सत्र में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद अब जीत को अपनी आदत बना लिया है। एंडी फ्लावर और मो बोबाट के नेतृत्व वाले ‘थिंक टैंक’ ने एक ऐसी चैंपियन टीम तैयार की है जो मैदान पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है।
आरसीबी चाहेगी कि निकट भविष्य में कोई ‘मेगा नीलामी’ नहीं हो क्योंकि टीम के ज्यादातर खिलाड़ी हर सत्र में अपने खेल को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं।
इस सत्र में उनकी मानसिकता अपने खिताब का बचाव करना नहीं, बल्कि आक्रामक तरीके से एक और ट्रॉफी जीतने की थी। इस मामले में उन्होंने निश्चित रूप से अपनी ‘कथनी’ को ‘करनी’ में बदला।
सुपरस्टार विराट कोहली अपने करियर के इस पड़ाव पर भी युवा खिलाड़ियों से मुकाबला करने के लिए लगातार अपने खेल में नए प्रयोग कर रहे हैं। वहीं भुवनेश्वर कुमार ने ‘वॉबली सीम’ का शानदार प्रदर्शन करके अपने पुराने दिनों की याद दिला दी और ऐसा खुद सचिन तेंदुलकर ने भी कहा है।
टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्हें जोश हेजलवुड का अच्छा साथ मिला। कृणाल पंड्या ने अपने वैरिएशन से सबको चौंकाया और अपना पांचवां आईपीएल खिताब जीता। तेज गेंदबाज रसिख सलाम ने भी इस सत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
देवदत्त पडिक्कल ने आधुनिक टी20 की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पारंपरिक खेल में साफ बदलाव किए जबकि कप्तान रजत पाटीदार ने अपने मैच जिताऊ प्रदर्शन से राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
वेंकटेश अय्यर को टूर्नामेंट के आखिर में ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर टीम में शामिल किया गया और उन्होंने भी शानदार प्रदर्शन किया।
आरसीबी इस प्रतियोगिता की सबसे मजबूत और संतुलित टीम लग रही थी और टीम वाकई में ऐसा खेली भी।
गुजरात टाइटन्स
अगर आरसीबी ने जीत को अपनी आदत बना लिया है तो टाइटन्स ने अपने छोटे से आईपीएल इतिहास में सबसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने पांच सत्र में तीन बार फाइनल में जगह बनाई है जिसमें अपने पहले ही सत्र में ख़िताब जीतना भी शामिल है।
शुभमन गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर ने लगातार रन बनाए। अगर कभी ये खिलाड़ी नाकाम रहे तो मध्यक्रम उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सका जिससे इसी विभाग को वह अगली नीलामी में मजबूत करना चाहेगी।
उनकी गेंदबाजी शायद इस टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन थी। फिर भी वे फाइनल की बाधा पार नहीं कर पाए। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक ऐसी टीम है जिसके पास कोई ‘बी योजना’ नहीं थी, यानी अगर उनका शानदार शीर्ष क्रम और नई गेंद से गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी नाकाम हो जाए, तो उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।
सनराइजर्स हैदराबाद :
पैट कमिंस की कप्तानी वाली इस टीम ने धीमी शुरुआत के बाद इस सत्र में ज्यादा कुछ गलत नहीं किया। हालाकि ‘एलिमिनेटर’ में वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर के शानदार प्रदर्शन के आगे उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनके लिए सकारात्मक चीज प्रफुल हिंगे और साकिब हुसैन जैसे तेज गेंदबाजों का उभरकर सामने आना रही।
पिछले सत्र के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद नीतिश रेड्डी ने बल्ले और गेंद दोनों से ही सही समय पर टीम के लिए अहम योगदान दिया।
अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड और ईशान किशन जैसे विस्फोटक शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने एक बार फिर रनों का अंबार लगाया। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज हेड का यह सत्र शायद उनकी अपनी उम्मीदों के मुताबिक उतना शानदार नहीं रहा।
चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले हेनरिक क्लासेन सबसे बेहतरीन बल्लेबाज साबित हुए। उन्होंने अपने लंबे आईपीएल करियर का सबसे शानदार सत्र खेला जिसमें उन्होंने 160 के स्ट्राइक रेट से कुल 624 रन बनाए।
टीम सपाट पिचों पर तो अच्छा खेली, लेकिन जब वे हैदराबाद से बाहर खेलने गए, तो उनका प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा।
राजस्थान रॉयल्स
कप्तान रियान पराग ने खुद यह बात स्वीकार की है कि रॉयल्स को लीग चरण के आखिरी दिन का इंतजार करने के बजाय, उससे काफी पहले ही प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर लेना चाहिए था। उनका अभियान काफी हद तक 15 साल के किशोर खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी पर निर्भर था जो अपने पहले पूरे सत्र में 237.30 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने।
आर्चर 25 विकेट लेकर टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में से एक थे।
जब सूर्यवंशी और आर्चर दोनों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तो टीम को संघर्ष करना पड़ा।
पराग ने कप्तान के तौर पर अपने पहले ही सत्र में प्लेऑफ में जगह बनाकर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बल्ले से लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए।
मैदान के बाहर की घटनाओं ने भी उनके अभियान में सुर्खियां बटोरीं जिसमें टीम मैनेजर रोमी भिंडर पर डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया जबकि पराग को टीवी पर ड्रेसिंग रूम में ‘वेपिंग’ करते हुए देखा गया।
पंजाब किंग्स:
आईपीएल के पहले हाफ में सबसे मजबूत टीम मानी जा रही पंजाब किंग्स ने दूसरे हाफ में लगातार छह मैच हारकर अपने प्लेऑफ में पहुंचने के मौकों को गंवा दिया। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने उनकी कमजोर गेंदबाजी की भरपाई कर दी थी, लेकिन बाद में क्षेत्ररक्षण समेत तीनों ही विभागों में उनका प्रदर्शन गिर गया।
कप्तान श्रेयस अय्यर ने बल्ले से एक ठीक-ठाक सत्र खेला। लेकिन टीम को नीलामी में अपनी गेंदबाजी को और मजबूत करना होगा। अर्शदीप सिंह के उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन का भी टीम पर बुरा असर पड़ा।
दिल्ली कैपिटल्स
लगातार दूसरे सत्र में दिल्ली कैपिटल्स अक्षर पटेल की कप्तानी में प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही। यह एक और ऐसा सत्र रहा जिसमें केएल राहुल ने 500 से ज्यादा रन बनाए लेकिन आखिरी नतीजों के लिहाज से उन रनों की अहमियत नहीं रही।
टीम के पास बल्लेबाजी में जरूरी ताकत की कमी थी। गेंदबाजी में भी जरूरी धार नहीं थी। टूर्नामेंट के पहले हाफ में मिचेल स्टार्क की गैरमौजूदगी ने इस कमी को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। टीम के मुख्य स्पिनर कुलदीप यादव के लिए यह भुलाने वाला सत्र रहा जबकि शानदार फॉर्म में चल रहे लुंगी एनगिडी भी कुछ खास नहीं कर पाए। उम्मीद की जा रही है कि टीम अपनी कप्तानी में बदलाव करेगी।
कोलकाता नाइट राइडर्स
शुरुआती छह मैच हारने के बाद भी 10 टीम में से सातवें स्थान पर रहकर केकेआर ने अच्छा प्रदर्शन किया। पूरी संभावना है कि अजिंक्य रहाणे ने आईपीएल में अपना आखिरी सत्र खेल लिया है। टीम को सभी विभागों में संघर्ष करना पड़ा और अब उसे पूरी तरह से नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। नीलामी में रिकॉर्ड 25.20 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बावजूद कैमरन ग्रीन के लिए भी यह कोई यादगार सत्र नहीं रहा।
चेन्नई सुपर किंग्स:
पांच बार की चैंपियन टीम 2023 में खिताब जीतने के बाद से अब तक प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही है। रूतुराज गायकवाड़ की अगुआई वाली फ्रेंचाइजी को अब अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। सबसे पहले एमएस धोनी को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए ताकि टीम भारत के इस पूर्व कप्तान के सुनहरे दिनों से आगे बढ़ सके। चोट की वजह से उन्होंने इस सत्र में एक भी मैच नहीं खेला, लेकिन धोनी के अलावा कोई नहीं जानता कि अगले सत्र में क्या होने वाला है।
2024 में कप्तान बनने के बाद से गायकवाड़ एक बल्लेबाज के तौर पर सफल नहीं रहे हैं। बल्लेबाजी लाइन-अप में अनुभव की कमी है।
हार्दिक पंड्या मुंबई इंडियंस छोड़ने वाले हैं तो सीएसके उन्हें कप्तानी की भूमिका के लिए अपनी टीम में शामिल करने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा अगर टीम इस दिशा में आगे बढ़ने का फैसला करती है तो संजू सैमसन कप्तानी के लिए एक तैयार विकल्प हैं।
मुंबई इंडियंस :
भारत के कई बड़े सितारों से सजी टीम इस सत्र में सबसे ज्यादा निराशाजनक प्रदर्शन करने वाली टीम रही। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक, सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की चौकड़ी इस सत्र को भुलाना चाहेगी। रोहित शर्मा ने शीर्ष क्रम में ठीक प्रदर्शन किया, लेकिन चोट की वजह से उनका सत्र प्रभावित रहा।
अब यह देखना बाकी है कि टीम प्रबंधन और मालिक अगले सत्र के लिए कप्तानी की जिम्मेदारी किसे सौंपते हैं। टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक बुमराह यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
लखनऊ सुपर जायंट्स :
दो निराशाजनक सत्र के बाद कप्तान ऋषभ पंत के पद छोड़ने के साथ ही अगले सत्र के लिए टीम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले हिस्से में टीम की बल्लेबाजी पूरी तरह फ्लॉप रही जबकि मोहम्मद शमी, मोहसिन खान और प्रिंस यादव की अगुवाई में गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया।
मोहसिन एकमात्र ऐसे गेंदबाज रहे जिन्होंने वैभव सूर्यवंशी के खिलाफ मेडन ओवर फेंका, जिसकी पहले कभी कल्पना भी नहीं की गई थी।
सत्र के दूसरे हिस्से में गेंदबाजों का प्रदर्शन कमजोर पड़ा। बल्लेबाज कभी भी एक साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। पंत का यह सत्र भी औसत दर्जे का ही रहा और निकोलस पूरन का प्रदर्शन तो बेहद निराशाजनक रहा। अब संजीव गोयंका कोच टॉम मूडी और जस्टिन लैंगर के साथ मिलकर नए कप्तान की तलाश करेंगे।
भाषा नमिता पंत
पंत

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