यह निराशाजनक है, हम अपनी रणनीति पर अमल नहीं कर पाए: अय्यर

यह निराशाजनक है, हम अपनी रणनीति पर अमल नहीं कर पाए: अय्यर

यह निराशाजनक है, हम अपनी रणनीति पर अमल नहीं कर पाए: अय्यर
Modified Date: July 10, 2026 / 09:22 am IST
Published Date: July 10, 2026 9:22 am IST

ब्रिस्टल, 10 जुलाई (भाषा) भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने इंग्लैंड के हाथों पहली बार टी20 श्रृंखला गंवाने के बाद अपनी निराशा नहीं छिपाई और स्वीकार किया कि उनकी टीम एक बार फिर सभी विभागों में पूरी तरह से विफल रही।

भारत ने तीसरे मैच में अय्यर के नाबाद 80 रन के बावजूद सात विकेट पर 158 रन ही बनाए। इंग्लैंड ने केवल 13.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर दिया।

अय्यर ने मैच के बाद कहा, ‘‘एक बार फिर हमने निराशाजनक प्रदर्शन किया। हमने पर्याप्त रन नहीं बनाए थे। आखिरकार हमने देखा कि उन्होंने कितनी जल्दी लक्ष्य हासिल कर दिया। जब हम गेंदबाजी करने आए तो मैंने गेंदबाजों से बस यही कहा कि वे जितना संभव हो सके एक ही लेंथ पर गेंद डालें।’’

अय्यर अपने प्रदर्शन से खुश थे, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि टीम जीत हासिल नहीं कर पाई।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने प्रदर्शन से काफी खुश हूं, लेकिन अगर इससे टीम को जीत नहीं मिलती तो इसका कोई मतलब नहीं। इस बात से मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि जब भी मैं खेलता हूं मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मेरी टीम जीते। लेकिन दुर्भाग्य से आज ऐसा नहीं हुआ। उम्मीद है कि अगले मैच में हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’’

अय्यर ने कहा कि मौजूदा भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है और उम्मीद जताई कि खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीखेंगे और जल्दी ही तालमेल बिठा लेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव का दौर है और हम गलतियां करेंगे। हमारे लिए यह समझना जरूरी है कि परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना कितना महत्वपूर्ण है।’’

इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रुक ने भारत पर मिली बड़ी जीत का श्रेय अपनी टीम की परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की क्षमता और खिलाड़ियों तथा कोचिंग स्टाफ के बीच अच्छे संवाद को दिया।

ब्रुक ने कहा, ‘‘भारत को हराना हमेशा अच्छा लगता है। एक मैच शेष रहते हुए उन्हें 3-0 से हराना, बहुत खुशी की बात है। हमारे दो बातें बिल्कुल अलग हैं। हमने जिस तरह से परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाया तथा हमारे खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के बीच संवाद। यह दो चीज सबसे खास रही हैं।’’

भाषा

पंत

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