ग्लास्गो में अपने खर्च पर पहुंचे जयवीर चौधरी, क्वालीफिकेशन राउंड में नीरज के साथ रहे

ग्लास्गो में अपने खर्च पर पहुंचे जयवीर चौधरी, क्वालीफिकेशन राउंड में नीरज के साथ रहे

ग्लास्गो में अपने खर्च पर पहुंचे जयवीर चौधरी, क्वालीफिकेशन राउंड में नीरज के साथ रहे
Modified Date: July 30, 2026 / 06:17 pm IST
Published Date: July 30, 2026 6:17 pm IST

ग्लास्गो, 30 जुलाई (भाषा) ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के निजी कोच जयवीर चौधरी बृहस्पतिवार को ग्लास्गो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में राष्ट्रमंडल खेलों के पुरुष भाला फेंक क्वालीफिकेशन राउंड के दौरान अपने शिष्य का मार्गदर्शन करते नजर आए।

जयवीर भारतीय दल का आधिकारिक हिस्सा नहीं थे इसलिए वह अपने खर्च पर यहां पहुंचे।

नीरज की अगुआई वाले 32 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स दल के साथ पांच कोच, दो फिजियोथेरेपिस्ट, एक डॉक्टर और दो अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल थे। खेल मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त इस सहयोगी स्टाफ का नेतृत्व मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर कर रहे थे, लेकिन जयवीर चौधरी का नाम इस सूची में शामिल नहीं था।

हालांकि भारतीय दल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नीरज के शुरुआती कोच रहे जयवीर चौधरी अपने खर्च पर ग्लास्गो पहुंचे। वह स्विट्जरलैंड के बिएन शहर से यहां आए, जहां राष्ट्रमंडल खेलों से पहले नीरज प्रशिक्षण ले रहे थे।

क्वालीफिकेशन मुकाबले के दौरान जयवीर को मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर के साथ कोचों के लिए निर्धारित क्षेत्र में बैठा देखा गया। यह स्थान उस ‘रन-अप’ क्षेत्र के पास था, जहां से भाला फेंक खिलाड़ी अपने प्रयास शुरू कर रहे थे।

भारतीय दल के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘हां, जयवीर अपने खर्च पर यहां आए हैं। वह मंत्रालय से मंजूर भारतीय दल का हिस्सा नहीं थे। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने उनके लिए मान्यता पत्र (एक्रिडिटेशन) और मैदान (फील्ड ऑफ प्ले) तक पहुंच की व्यवस्था की। ’’

नीरज के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने पुरुष भाला फेंक फाइनल में जगह बनाई।

मार्च में पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बार राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय दल में खिलाड़ियों के निजी कोचों को शामिल नहीं किया गया था।

खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि निजी कोचों के मामले में खिलाड़ी के विकास में उनके योगदान और नियमित जुड़ाव का आकलन किया जाएगा, लेकिन उन्हें सरकार द्वारा स्वीकृत दल की संख्या से अतिरिक्त सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा, भले ही सरकार पर इसका कोई खर्च नहीं आए।

भाषा नमिता पंत

पंत


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