कोठारी ने अहमदाबाद में होने वाले 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में क्यू खेलों को शामिल करने की वकालत की

कोठारी ने अहमदाबाद में होने वाले 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में क्यू खेलों को शामिल करने की वकालत की

कोठारी ने अहमदाबाद में होने वाले 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में क्यू खेलों को शामिल करने की वकालत की
Modified Date: April 30, 2026 / 07:02 pm IST
Published Date: April 30, 2026 7:02 pm IST

कोलकाता, 30 अप्रैल (भाषा) आयरलैंड के कारलो में आईबीएसएफ विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने वाले सौरव कोठारी ने 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के शताब्दी चरण में क्यू खेलों (स्नूकर और बिलियर्ड्स) को शामिल करने जोरदार वकालत की।

कई बार के विश्व चैंपियन ने कहा, ‘‘बिलियर्ड्स और स्नूकर में कई पदक जीतने का शानदार मौका है। हमने एशियाई खेलों में कई स्वर्ण पदक जीते हैं। अगर हमें राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया जाता है तो भारत की पदक तालिका के लिए यह बहुत अच्छा होगा। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें साइ, मंत्रालय और मीडिया से सहयोग की जरूरत है। विश्व और एशियाई चैंपियनों के इतने समृद्ध इतिहास वाले इस खेल का बहु-महाद्वीपीय प्रतियोगिता में अपना स्थान पाने का पूरा हक है। ’’

कोठारी अपने पिता के निधन से अभी तक उबर नहीं सके हैं और उनका कहना है कि वह अब भी अंदरूनी द्वंद्व से जूझ रहे हैं।

उन्होंने हालांकि कहा कि एक अजीब खालीपन ने उन्हें लगातार दो विश्व खिताब जीतने के सफर में दबाव से निपटने में भी मदद की।

कोठारी ने मंगलवार को भारतीय दिग्गज पंकज आडवाणी को 1133-477 से हराकर वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप का खिताब बरकरार रखा।

कोठारी (41 साल) को यह जीत उनके पिता और गुरु मनोज कोठारी के निधन के चार महीने से भी कम समय बाद मिली।

भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में कोठारी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जीत और हार मेरे लिए कोई मायने नहीं रखतीं क्योंकि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ हो गया है कि बाकी सब कुछ छोटा लगने लगा है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप किसी चीज को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देते तो उससे दबाव नहीं बनता। हमारा खेल इस बात पर निर्भर करता है कि आप दबाव को कैसे संभालते हैं, और क्योंकि मैं अंदर से इतना खालीपन महसूस कर रहा हूं कि मुझे लगता है कि मैंने दबाव को कहीं बेहतर तरीके से संभाला। ’’

कोठारी ने कहा, ‘‘मुझसे किसी को कोई उम्मीद नहीं है। मुझे खुद से भी कोई उम्मीद नहीं है, और शायद इसी वजह से मैं यह विश्व खिताब जीत पाया। ’’

इस खिताब पर उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत मीठी और कड़वी इसलिए है क्योंकि विश्व खिताब जीतना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, उसे बचाए रखना तो दूर की बात है। और यह कड़वा इसलिए है क्योंकि मेरी दिली इच्छा थी कि मेरे पिता यहां होते और मुझे यह उपलब्धि दोबारा हासिल करते हुए देखते। मेरा मतलब है कि मुझे सच्चाई को स्वीकार करके समय के साथ आगे बढ़ना होगा। ’’

अपने पिता के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए कोठारी ने कहा कि उनकी कमी अभी भी बहुत ज्यादा खलती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अब भी अपने मन के अंदरूनी द्वंद्व से लड़ रहा हूं। मेरी जिंदगी का हर कदम मेरे पिता से जुड़ा हुआ था। मुझे वह हर जगह महसूस देते हैं और मुझे अब भी महसूस होता है कि वह मेरे आस-पास ही हैं। ’’

कोठारी ने यह भी याद किया कि कैसे अपने पिता के गुजरने के तुरंत बाद उन्हें राष्ट्रीय चैंपियनशिप खेलने के लिए मनाया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं कोलकाता में अपने कमरे में बैठा था। मैंने खुद को कमरे में बंद कर लिया था और रो रहा था, तभी महासंघ के सचिव (सुनील बजाज) का फोन आया और उन्होंने कहा, ‘मैं तुम्हें एक भाई की तरह फोन कर रहा हूं, कृपया आओ और खेलो।’ मेरी मां ने भी मुझे हिम्मत दी और मैं गया और खेला और राष्ट्रीय खिताब जीत लिया। ’’

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर


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