नाबालिग लड़कियों के लापता मामलों पर उच्च न्यायालय सख्त, पुलिस निगरानी पर उठाए सवाल

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नाबालिग लड़कियों के लापता मामलों पर उच्च न्यायालय सख्त, पुलिस निगरानी पर उठाए सवाल

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 12:53 AM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 12:53 AM IST

लखनऊ, आठ जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की राजधानी में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की और वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसे मामलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया तथा उनके अधिकार क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों, सर्किल अधिकारियों और जांच अधिकारियों को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने शहर के विभिन्न थानों में इसी प्रकार की घटनाओं को लेकर लखनऊ पुलिस आयुक्त से भी स्पष्टीकरण मांगा। अदालत ने कहा कि नाबालिग लड़कियों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस को अधिक सतर्कता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान पुलिस उपायुक्त ने एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि उनके पर्यवेक्षण वाले नौ थानों से 81 महिलाओं और लड़कियों, जिनमें अधिकांश नाबालिग थीं, के अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाए जाने के मामले सामने आए हैं। इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 लड़कियां अभी भी लापता हैं।

अदालत ने डीसीपी को ऐसे मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया जो पुलिस को रिपोर्ट ही नहीं किए गए हों और उन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यक हो वहां सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और जांच अधिकारी ऐसे मामलों को गंभीरता से लें।

ये निर्देश बीबीडी थाना क्षेत्र से लगभग चार महीने से लापता 12 वर्षीय लड़की से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए। अदालत के हस्तक्षेप के बाद लड़की को बरामद कर पेश किया गया।

अदालत द्वारा पूछे जाने पर उसने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद उसकी अभिरक्षा उन्हें सौंप दी गई।

अदालत ने उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार राय द्वारा की गई जांच पर असंतोष जताते हुए कहा कि उन्होंने न तो उचित जांच की और न ही बच्ची को ढूंढने के लिए पर्याप्त प्रयास किए। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत