नाबालिग पैरा साइकिलिस्ट लिशा को राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाने का डर
नाबालिग पैरा साइकिलिस्ट लिशा को राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाने का डर
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) राष्ट्रमंडल खेलों में जगह बनाने वाली भारत की एकमात्र पैरा साइकिलिस्ट 16 साल की लिशा दास को डर है कि वह इस बहु खेल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाएंगी क्योंकि उनके कोच को मान्यता कार्ड (एक्रिडिटेशन ) नहीं मिला है और उनकी जगह ग्लास्गो में उनके साथ जाने के लिए भारतीय साइकिलिंग महासंघ (सीएफआई) के एक अधिकारी को चुना गया है।
लिशा ने महिलाओं के सी-5 वर्ग में महाद्वीपीय रैंकिंग के जरिए ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। उन्होंने अपने निजी कोच आदित्य मेहता के लिए एक्रिडिटेशन की मांग करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई), सीएफआई, खेल सचिव और केंद्रीय खेल मंत्रालय को कई ईमेल लिखे हैं।
दाहिने हाथ में शारीरिक कमी से जूझने वाली इस किशोर खिलाड़ी ने आरोप लगाया कि उनसे बार-बार माता-पिता की सहमति वाला पत्र लेने के लिए कहा गया जिसमें सीएफआई के कार्यकारी सदस्य के दत्तात्रेय को खेलों के लिए उनका कोच बताया गया हो।
पीटीआई के पास मौजूद ईमेल में उन्होंने लिखा, ‘‘ना तो मेरे माता-पिता, ना ही मेरे कोच और ना ही मुझे कभी बताया गया कि के दत्तात्रेय को मेरे साथ जाने वाले अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक नाबालिग महिला पैरा खिलाड़ी हूं। के दत्तात्रेय को मेरे साथ जाने वाले अधिकारी के तौर पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। मुझे एक महिला एस्कॉर्ट और एक मेडिकल पेशेवर की जरूरत है।’’
लिशा ने कहा, ‘‘शुरुआत में मेरे से बार-बार एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया जिसमें यह लिखा था कि के दत्तात्रेय राष्ट्रमंडल खेलों के लिए मेरे कोच के तौर पर मेरे साथ जाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि दत्तात्रेय कभी उनके कोच नहीं रहे थे।
लिशा ने कहा, ‘‘मेरे पूरे सफर के दौरान मुझे ट्रेनिंग देने वाले और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने में मेरी मदद करने वाले कोच आदित्य मेहता हैं। हालांकि उनका नाम कभी भी प्रस्तावित नहीं किया गया।’’
हालांकि खेल मंत्रालय ने ग्लास्गो खेलों के लिए भारतीय दल में किसी निजी कोच को शामिल नहीं किया है।
लिशा ने कहा कि मेहता अपना खर्च खुद उठाने को तैयार थे और वह सिर्फ आधिकारिक तौर पर उनके साथ जाने के लिए जरूरी एक्रिडिटेशन चाहते थे।
भाषा सुधीर आनन्द
आनन्द

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