मेरा द्रोणाचार्य पुरस्कार इतने वर्षों तक मेरे शिष्यों की प्रतिबद्धता का नतीजा है: परवीर

मेरा द्रोणाचार्य पुरस्कार इतने वर्षों तक मेरे शिष्यों की प्रतिबद्धता का नतीजा है: परवीर

मेरा द्रोणाचार्य पुरस्कार इतने वर्षों तक मेरे शिष्यों की प्रतिबद्धता का नतीजा है: परवीर
Modified Date: August 19, 2026 / 07:59 pm IST
Published Date: August 19, 2026 7:59 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) अनुभवी कोच परवीर सिंह ने सीमा पूनिया को 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक दिलाने से लेकर 2022 एशियाई खेलों में अपने शिष्य तेजिंदरपाल सिंह तूर और अन्नू रानी के स्वर्ण पदक तक पिछले 25 वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स में हुई तरक्की को करीब से देखा है।

प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चुने गए सिंह एशियाई क्षेत्र में कोच प्रशिक्षक भी हैं और कोचिंग में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर चुके हैं।

वह फिलहाल विश्व एथलेटिक्स लेवल-3 लेक्चरर हैं और फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड तथा भूटान सहित कई देशों के कोच को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने 2021 में पटियाला स्थित पंजाबी विश्वविद्यालय के खेल कोचिंग विभाग से पीएचडी की उपाधि हासिल की। वह वर्तमान में एनआईएस पटियाला में भारतीय एथलेटिक्स के उप मुख्य कोच हैं।

सिंह ने पीटीआई के साथ बातचीत में कहा, ‘‘मैं 2001 से भारतीय एथलेटिक्स टीम से जुड़ा हूं और देश के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है। सही मायने में मेरा द्रोणाचार्य पुरस्कार इतने वर्षों तक मेरे शिष्यों की प्रतिबद्धता का नतीजा है। सीमा पूनिया, हरवंत कौर, कृष्णा पूनिया और हाल में तेजिंदर तूर, अन्नू रानी के अलावा कई अन्य खिलाड़ियों ने इसमें योगदान दिया है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने मुझे भारतीय एथलेटिक्स के विकास में योगदान देने का मंच दिया। मुझे खुशी है कि मेरे काम को पहचान मिली। मैं सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं क्योंकि यह सामूहिक प्रयास है। यह सिर्फ मेरा प्रयास नहीं है। ’’

सिंह के मार्गदर्शन में चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा पूनिया ने 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर अपने चार राष्ट्रमंडल खेल पदकों में से पहला पदक हासिल किया था।

दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में हरवंत कौर ने रजत पदक जीता था और उस समय वह सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थीं। कृष्णा पूनिया भी 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से कुछ वर्ष पहले सिंह के साथ प्रशिक्षण ले चुकी थीं। उन्होंने दिल्ली में महिलाओं की चक्का फेंक स्पर्धा में भारत के पहले, दूसरे और तीसने स्थान के क्लीन स्वीप में स्वर्ण पदक जीता था।

बाद में सिंह को चक्का फेंक से हटाकर गोला फेंक और भाला फेंक का कोच बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में तेजिंदरपाल सिंह तूर और अन्नू रानी ने 2022 एशियाई खेलों में क्रमश: गोला फेंक और भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीते।

सिंह ने कहा, ‘‘हांगझोउ में तेजिंदर तूर और अन्नू का गोला फेंक और भाला फेंक में एक-एक स्वर्ण जीतना बहुत संतोषजनक पल था। यह कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और समर्पण का नतीजा है। ’’

सिंह 2022 से 2025 तक तेजिंदर तूर के साथ रहे। अन्नू भी 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने के समय सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थीं।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने सिंह को 2025 का सर्वश्रेष्ठ कोच चुना था। वह फिलहाल एनआईएस पटियाला में भाला फेंक खिलाड़ियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें रोहित यादव भी शामिल हैं जिन्होंने जून में 87.05 मीटर के प्रयास के साथ इस सत्र का देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर


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