नीरू और काइनन की जोड़ी को ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण, भारत की ‘शॉटगन क्वीन’ फिर चमकीं

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नीरू और काइनन की जोड़ी को ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण, भारत की ‘शॉटगन क्वीन’ फिर चमकीं

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 04:52 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 04:52 PM IST

(अजय मसंद)

नागोया, 30 सितंबर (भाषा) व्यक्तिगत वर्ग में खिताब जीतने वाली नीरू धांडा ने काइनन चेनाई के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता जिससे बुधवार को उनका ऐतिहासिक अभियान पूरा हुआ और वह यहां चल रहे एशियाई खेलों में सबसे सफल भारतीय एथलीट बन गईं।

छब्बीस वर्षीय निशानेबाज ने एक दिन पहले एशियाई खेलों में व्यक्तिगत शॉटगन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा था। इस तरह उन्होंने तीन पदकों की शानदार उपलब्धि पूरी की जिसमें महिलाओं की टीम ट्रैप स्पर्धा का रजत भी शामिल है।

यह जीत और भी उल्लेखनीय रही क्योंकि नीरू को खेलों से 10 दिन पहले बीमार होने के कारण एच1एन1 की आंशका के चलते भारत में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था और वह थकान और बीमारी के बाद की कमजोरी से जूझ रही थीं।

भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 40 में से 34 निशानों के एशियाई और खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कतर (32) को हराकर भारतीय शॉटगन निशानेबाजी के लिए एक और ऐतिहासिक क्षण रचा।

उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज और दो बार के ओलंपिक चैंपियन माइकल डायमंड द्वारा प्रशिक्षित कतर को तीन शॉट रहते हरा दिया।

नीरू हालांकि अपने अंतिम दो निशानों में चूक गईं लेकिन तब तक वह भारत की जीत सुनिश्चित कर चुकीं थीं। इसके बाद हुआ जश्न उपलब्धि जितना ही जोरदार था।

नीरू ने मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ टीम रजत जीता था। नीरू एक दिन पहले व्यक्तिगत स्वर्ण पदक के दौरान लगभग तीन घंटे बारिश से जूझने के बाद थकी हुई दिखीं और बुधवार को मिश्रित टीम क्वालीफिकेशन में 75 में से केवल 63 निशाने लगा सकीं।

हालांकि काइनन ने मौके का पूरा फायदा उठाया। पुरुषों की ट्रैप प्रतियोगिता में निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद इस अनुभवी निशानेबाज ने 75 में से शानदार 73 निशाने लगाकर भारत का संयुक्त स्कोर 136 तक पहुंचाया और फाइनल में जगह पक्की की।

चीन ने 142 के खेल रिकॉर्ड के साथ क्वालीफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया, उसके बाद कतर 139 और ईरान 138 पर रहे जबकि भारत चौथे स्थान पर रहते हुए किसी तरह फाइनल में पहुंचा।

कुछ समय के लिए भारतीयों के लिए फाइनल में जगह भी अनिश्चित लग रही थी। हालांकि क्वालीफिकेशन और फाइनल के बीच दो घंटे के अंतराल ने नीरू को कुछ जरूरी समय संभलने के लिए दिया।

भारत के लिए फाइनल की शुरुआत चिंताजनक रही। काइनन अपने शुरुआती शॉट से चूक गए जबकि नीरू अपने पहले पांच में से तीन निशानों से चूक गईं जिससे शुरुआती 10 प्रयासों में उनके खाते में केवल छह निशाने रह गए। पहली सीरीज में चार चूक के साथ भारतीय जोड़ी बाहर होती लग रही थी।

लेकिन काइनन ने कमान संभाली, अपनी लय हासिल की। उन्होंने अपने अगले 19 शॉट लगातार निशाने पर लगाए जिससे नीरू को मुकाबले में स्थिर होने के लिए जरूरी स्थिरता और आत्मविश्वास मिला।

नीरू ने अपनी शुरुआती तीन चूक के बाद लगातार 13 निशाने लगाए जिससे भारत को केवल दो शॉट बाकी रहते कतर पर तीन शॉट की निर्णायक बढ़त बनाने में मदद मिली।

हालांकि नीरू अपने अंतिम दो प्रयासों में लड़खड़ा गईं लेकिन तब तक पदक सुरक्षित हो चुका था। भारत ने ऐसी बढ़त बना ली थी जिसे पलटना संभव नहीं था और कतर अब उनकी स्थिति को चुनौती नहीं दे सकता था।

इस जोड़ी ने डगमगाती शुरुआत को दबदबे वाले अंत में बदल दिया और ऐसा स्वर्ण दिलाया जिसने शॉटगन शूटिंग में भारत की ताकत को और रेखांकित किया।

नीरू ने कहा, ‘‘हां, कल तीन घंटे बारिश में पूरी तरह भीगने के बाद मैं थक गई थी। मेरे कपड़े गीले और ठंडे थे। अस्पताल में कई दिन बिताने के बाद मैं अब भी अपनी बीमारी से उबर रही हूं। लगातार दिनों में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल था। ’’

काइनन के लिए यह उनका तीसरा एशियाई खेल पदक था जिसमें हांग्झोउ चरण में जीते पुरुषों की टीम ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण और व्यक्तिगत कांस्य भी शामिल हैं।

बुधवार का उनका प्रदर्शन निराशाजनक व्यक्तिगत अभियान के बाद खास तौर पर संतोषजनक रहा और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता की बंदूक की बैरल को दिया।

सैंतीस साल के काइनन उस बैरल से निशाना लगा रहे थे जो उनके पिता डेरियस का था, जो दो बार के राष्ट्रीय ट्रैप चैंपियन हैं और अब भी सीनियर वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। उनके पिता ने यह बैरल लगभग तीन दशक पहले खरीदा था और यह उनके लिए भाग्यशाली आकर्षण बन गया था।

काइनने ने कहा, ‘‘आज मैंने जिस बैरल से निशाना लगाया, वह मेरे पिता का है। मैं खुश हूं कि यह मेरे लिए इतना भाग्यशाली साबित हुआ। उम्मीद है कि वह मुझसे इसे वापस मांगेंगे नहीं। ’’

दो स्वर्ण सहित तीन पदकों के साथ नीरू भारतीय दल की प्रमुख प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों में से एक बन गई हैं और उन्होंने देश के शॉटगन निशानेबाज इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें समापन समारोह में ध्वजवाहक की भूमिका के लिए चुने जाने की उम्मीद है तो नीरू ने कहा कि वह इस सम्मान को खुशी से स्वीकार करेंगी।

भाषा पंत नमिता मोना

मोना