पुरानी यादें: जब अप्रैल फूल के मजाक के कारण गांगुली ने संन्यास लेने की पेशकश की थी
पुरानी यादें: जब अप्रैल फूल के मजाक के कारण गांगुली ने संन्यास लेने की पेशकश की थी
(विजय जोशी)
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) यह शरारत कुछ हंसी-मजाक के इरादे से की गई थी, लेकिन इस बीच ड्रामा इतना गंभीर हो गया कि एक अनुभवी भारतीय कप्तान ने पूरी तरह से आहत होकर अपना पद छोड़ने की पेशकश कर दी।
यह 2005 का अप्रैल फूल का दिन था, जब कोच्चि में पाकिस्तान के खिलाफ एक दिवसीय श्रृंखला की शुरुआत से पहले भारतीय टीम को अभ्यास करना था।
भारतीय खिलाड़ियों पर निश्चित रूप से उम्मीदों का बोझ था। ऐसी स्थिति में युवराज सिंह ने हरभजन सिंह के साथ मिलकर फैसला किया कि तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के साथ शरारत करना ड्रेसिंग रूम के माहौल को हल्का करने का सबसे अच्छा तरीका होगा।
वे नकली अखबार की कतरनें लेकर अंदर आए जिनमें गांगुली ने अपने साथियों को अय्याश, गैर-जिम्मेदार और लापरवाह बताया था। ये कतरनें इतनी असली लग रही थीं कि आमतौर पर शांत रहने वाले ‘प्रिंस ऑफ़ कोलकाता’ भी उसे देखकर सचमुच दंग रह गए।
हरभजन ने पिछले हफ्ते यहां पीटीआई मुख्यालय में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए कहा, ‘‘पूरी टीम बैठी हुई थी जब हमने यह ड्रामा रचा और दादा को अप्रैल फूल बनाने का फैसला किया। युवराज सिंह ने शुरुआत करते हुए कहा, ‘दादा, आपने प्रेस में क्या बयान दिया है। उन्होंने दादा से कहा कि आपने कहा है कि युवराज सिंह पार्टी करने का शौकीन है, हरभजन को किसी की परवाह नहीं है, आशीष नेहरा भी अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं और जहीर खान भी खूब पार्टी करते हैं।’’
46 वर्षीय हरभजन ने कहा, ‘‘दादा ने पूछा, ‘मैंने ऐसा कब कहा?’ इसके बाद उन्हें अखबार की कतरनें दिखाईं गई और उनसे पूछा गया, यह क्या है?‘‘
गांगुली इससे असमंजस में पड़ गए। वह कुछ समझ पाते उससे पहले ही सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ भी इसमें शामिल हो गए और उन्होंने इस बात को ऐसी विश्वसनीयता दी कि उसे नकारना असंभव था।
हरभजन ने कहा, ‘‘हमने अपने सीनियर खिलाड़ियों को पहले ही इस बारे में बता दिया था। मैंने पाजी (तेंदुलकर) से कहा, ‘पाजी, आप उनसे बात कीजिए।’ और उन्होंने दादा से कहा, ‘दादा, अगर आपने ऐसा किया है, तो यह गलत है।’ राहुल द्रविड़ भी उनका साथ दे रहे थे। उन्होंने भी कहा, ‘दादा, यार, ऐसा करना ठीक नहीं है।’ जब दो सीनियर खिलाड़ियों ने ऐसा कहा, तो दादा सोच में पड़ गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दादा ने कहा, ‘मैं कसम खाता हूं, मैंने ऐसा नहीं किया। अगर यह साबित हो जाता है कि मैंने ऐसा किया है तो मैं कप्तानी छोड़ दूंगा।’’
मामला यहीं पर नहीं थमा। हरभजन और कुछ अन्य खिलाड़ियों ने अपनी किट उठाई और ड्रेसिंग रूम से बाहर जाने लगे, जिससे गांगुली की बेचैनी बढ़ गई।
हरभजन ने कहा, ‘‘जब दादा अखबार की कतरने पढ़ रहे थे तो हम दो-तीन लोगों ने अपने बैग उठाए और बाहर जाने लगे। दादा हमारे पीछे दौड़ते हुए आए और बोले, ‘अरे यार, रुको। कल मैच है। तुम लोग क्या कर रहे हो?’’
हालांकि, मामला और पेचीदा होने से पहले ही यह नाटक खत्म हो गया क्योंकि किसी की हंसी छूट गई और नाटक का भंडाफोड़ हो गया।
हरभजन ने कहा, ‘‘दादा उस तरह के कप्तान थे जिन्हें हम उस दिन आसानी से बेवकूफ बना सकते थे, लेकिन बाद में हमें लगा, ‘यार, हमने इस भले आदमी को वास्तव में बहुत परेशान किया।’ कोई दूसरा कप्तान होता तो वह सचमुच हमें अपना सामान उठाने के लिए कहता और कहता, ‘यहां से निकलो और घर जाओ। लेकिन वह मेरे लिए बड़े भाई की तरह थे।’’
जब ड्रेसिंग रूम में यह तनाव पैदा हो गया था तब टीम के मुख्य कोच जॉन राइट अभ्यास के लिए फील्डिंग ‘कोन’ लगाने में व्यस्त थे।
आखिरकार यह पाकिस्तान के खिलाफ बेहद महत्वपूर्ण घरेलू श्रृंखला थी और हरभजन ने उन्हें विशेष रूप से इस बार ‘टीम के आंतरिक मामलों’ से दूर रहने के लिए कहा था।
मिलनसार स्वभाव वाले राइट धैर्यपूर्वक मैदान पर इंतजार करते रहे, और साथ ही सोचते रहे कि आखिर ऐसी क्या बात हो सकती है जो खिलाड़ी इतनी देर तक ड्रेसिंग रूम में जमे हुए हैं।
हरभजन ने कहा, ‘‘जॉन राइट बाहर इंतजार कर रहे थे और सोच रहे थे कि ‘खिलाड़ी कब बाहर आएंगे? मैं उन्हें फील्डिंग का अभ्यास कब करवाऊंगा।’ 15 मिनट, 20 मिनट बीत गए। टीम अभी भी बाहर नहीं आई थी। वह बाहर इंतजार करते रहे जबकि अंदर यह सारा ड्रामा चल रहा था।’’
हरभजन ने कहा कि इस तरह की शरारतें टीम के साथियों के साथ मेलजोल बढ़ाने, उनके साथ कुछ हंसी-मजाक करने और माहौल को खुशनुमा बनाए रखने का एक अच्छा तरीका है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप सिर्फ क्रिकेट की बात करें तो ड्रेसिंग रूम का माहौल गंभीर हो जाता है। फिर कोई मजा नहीं आता। ड्रेसिंग रूम का माहौल खुशनुमा रहना चाहिए। इससे जीत में मदद मिलती है।’’
हरभजन ने कहा, ‘‘आप मैदान में वापस लौटते हैं, उस पर चर्चा करते हैं और बस बात खत्म हो जाती है। अगर आप लगातार खेल के बारे में सोचते रहेंगे और उसी में उलझे रहेंगे तो माहौल गमगीन हो जाएगा। अगर आपने ऐसा माहौल बना दिया है, तो वापस जाने पर आप क्या करेंगे?’’
उनकी यह बात सच साबित हुई क्योंकि वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के शतकों की बदौलत भारत ने पाकिस्तान को 87 रन से हरा दिया। इस मैच में तेंदुलकर ने पांच विकेट लिए।
इन छह मैचों का परिणाम हालांकि निराशाजनक रहा क्योंकि भारत को पहले दो मैच जीतने के बाद 2-4 से हार का सामना करना पड़ा था।
भाषा
पंत सुधीर
सुधीर

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