(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) मुक्केबाज परवीन हुड्डा एशियाई खेलों में उस पदक की तलाश में वापसी कर रही हैं जो उन्होंने कभी जीता था लेकिन प्रतिबंध लगने के कारण उनसे छीन लिया गया था।
इस भारतीय मुक्केबाज ने 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में 57 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इससे उन्होंने भारत के लिए ओलंपिक कोटा भी हासिल किया था लेकिन निलंबन के कारण यह दोनों ही उनके हाथ से चले गए थे।
पदक गंवाने की टीस अब भी बनी हुई है लेकिन परवीन अब नए भार वर्ग में उससे भी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस 26 वर्षीय खिलाड़ी से जब पीटीआई ने पूछा कि क्या एशियाई खेलों में कोई अधूरा काम पूरा करना बाकी है, उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से हां।’’
कांस्य पदक को गंवाए हुए लगभग दो साल हो गए हैं। लेकिन उसे जीतने की याद अभी भी ताज़ा है। और उसके बाद जो हुआ, उसका अहसास भी।
परवीन को मई 2024 में वाडा द्वारा 22 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि 12 महीने की अवधि में तीन बार उन्होंने अपने ठिकाने का खुलासा नहीं किया था। बाद में निलंबन की तारीख 14 महीने पीछे कर दी गई, जिसके चलते उन्हें एशियाई खेलों का पदक और भारत के लिए हासिल किया गया ओलंपिक कोटा दोनों से हाथ धोना पड़ा।
पिछले साल नवंबर में जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में वापसी की तो उन्हें 57 किलोग्राम वर्ग में खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि जैस्मीन लैंबोरिया ने इस भार वर्ग में भारत के लिए पेरिस ओलंपिक कोटा हासिल किया और फिर विश्व चैम्पियनशिप का खिताब भी अपने नाम किया।
इसलिए परवीन ने अपना वजन बढ़ाकर 60 किलो कर लिया।
विश्व कप फाइनल में उन्होंने बड़ी सहजता से स्वर्ण पदक जीता। लेकिन चोट के कारण वह इस साल की शुरुआत में एशियाई चैंपियनशिप में भाग नहीं ले पाई जहां प्रिया घंघास ने 60 किलोग्राम वर्ग का खिताब जीता और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई किया।
परवीन को फिर से अपना भार वर्ग बदलना पड़ा। उन्होंने 65 किग्रा में अपना भाग्य आजमाया लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के क्वार्टर फाइनल में बाहर होने से पता चलता है कि उनके लिए यह चुनौती आसान नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस वजन वर्ग में राष्ट्रमंडल खेल मेरी पहली बड़ी प्रतियोगिता थी। वजन को लेकर कुछ समस्या थी और ताकत भी कम थी क्योंकि यह उस भार वर्ग से कहीं अधिक है जिसमें मैं पहले प्रतिस्पर्धा करती थी।’’
परवीन ने कहा, ‘‘लेकिन इसके बाद मैंने अपनी गलतियों पर काम किया और अब मैं इस वजन वर्ग में पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं। मेरा लक्ष्य पहले से बेहतर प्रदर्शन करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी लेकिन हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारे कोच ने हमारी प्रतिद्वंदियों को ध्यान में रखकर ही हमारा कार्यक्रम तैयार किया है।’’
भाषा पंत मोना
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