साइ और बीएफआई में बातचीत, मानदंडों में संशोधन होने पर मूल्यांकन शिविर पर लगा निलंबन होगा रद्द

Ads

साइ और बीएफआई में बातचीत, मानदंडों में संशोधन होने पर मूल्यांकन शिविर पर लगा निलंबन होगा रद्द

  •  
  • Publish Date - May 11, 2026 / 10:19 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 10:19 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा कथित अनियमितताओं के चलते भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के मूल्यांकन शिविर को निलंबित किए जाने के एक दिन बाद ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत में समाधान के संकेत सामने आए हैं।

चर्चा के बाद महासंघ ने चयन मानदंडों को नए सिरे से तैयार करने पर सहमति जताई है।

सूत्रों के अनुसार, यह शिविर तब तक फिर से शुरू नहीं हो सकता है, जब तक बीएफआई लिखित रूप से यह आश्वासन नहीं देता कि चयन प्रक्रिया और मुकाबलों के परिणाम को कोचों और उच्च प्रदर्शन स्टाफ की बैठकों के बाद रोककर नहीं रखा जाएगा।

यह पता चला है कि महिला मुख्य कोच सैंटियागो नीवा और पुरुष मुख्य कोच सीए कुट्टप्पा ने सोमवार को साइ के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें महासंघ को निष्पक्षता के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करने को कहा गया।

साइ के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, “कोई भी मूल्यांकन शिविर के खिलाफ नहीं था, लेकिन बीएफआई निष्पक्षता के सिद्धांतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। अब उन्हें इन सिद्धांतों का पालन करने के लिए कहा गया है और उन्होंने सहमति भी जताई है, लेकिन अभी लिखित आश्वासन मिलना बाकी है।”

बीएफआई अगर यह लिखित आश्वासन दे देता है, तो आकलन प्रक्रिया बुधवार से फिर शुरू हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार, “दोनों कोच ने साइ को भरोसा दिलाया है कि आंतरिक समीक्षा के नाम पर मुकाबलों के परिणाम रोकने की विवादित प्रक्रिया अब समाप्त कर दी जाएगी। इसके बजाय परिणाम तुरंत घोषित किए जाएंगे ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात के आरोप न लगें।”

साइ ने रविवार को यह शिविर इसलिए निलंबित किया था क्योंकि कई मुक्केबाजों ने चयन प्रक्रिया के प्रस्तावित प्रारूप को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं।

यह मूल्यांकन शिविर जुलाई-अगस्त में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो) और सितंबर-अक्टूबर में होने वाले एशियाई खेल (आइची-नागोया) के लिए भारत के शेष मुक्केबाजों के चयन के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

इस बीच, राष्ट्रमंडल खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता मनोज कुमार ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन नीति पर गंभीर चिंता जताई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महासंघ में “मूल्यांकन” और शिविर आधारित चयन प्रक्रिया पर बढ़ती निर्भरता ने खिलाड़ियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

उन्होंने पत्र में लिखा, “पहले चयन प्रक्रिया अधिक खुली और निष्पक्ष होती थी। अर्जुन पुरस्कार विजेताओं और अनुभवी खिलाड़ियों की एक स्वतंत्र समिति बनाई जाती थी, ट्रायल्स कई दिनों तक सभी की मौजूदगी में होते थे और खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा अवसर मिलता था।”

उन्होंने आगे कहा, “आज चयन प्रक्रिया के नाम पर खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है और चयन से जुड़े कई विवाद अदालतों तक पहुंच रहे हैं।”

मनोज कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रायल्स के दौरान कई बार खिलाड़ियों के माता-पिता और निजी कोचों को भी प्रक्रिया देखने की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

भाषा आनन्द सुधीर

सुधीर