श्रीलंका के खिलाफ स्पिनरों के गढ़ में सिराज के सामने होगी समीकरण बदलने की चुनौती
श्रीलंका के खिलाफ स्पिनरों के गढ़ में सिराज के सामने होगी समीकरण बदलने की चुनौती
… जी उन्नीकृष्णन …
गॉल, 12 अगस्त (भाषा) गॉल और कोलंबो की धीमी और टर्न लेती पिचों पर स्पिनरों के हावी रहने की चर्चा शनिवार से शुरू हो रही भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला से पहले सबसे ज्यादा हो रही है लेकिन एक गेंदबाज इस कहानी को बदलने के लिए बेताब होगा और वह हैं मोहम्मद सिराज। शीर्ष तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज को मुख्य तेज गेंदबाज की भूमिका निभानी होगी। उन्हें प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़ और आकिब नबी का भी मार्गदर्शन करना होगा। सिराज के लिए यह भूमिका नई नहीं है। बुमराह की गैरमौजूदगी में वह कई बार टीम की तेज गेंदबाजी की अगुआई कर चुके हैं। पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट इसका उदाहरण है। बुमराह के कार्यभार प्रबंधन के कारण उस मैच से बाहर रहने पर सिराज ने पहली पारी में छह विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। सिराज ने उस श्रृंखला में 1113 गेंदें फेंकी थीं और 23 विकेट लिए थे। हालांकि, 32 वर्षीय इस गेंदबाज को श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में इतनी गेंदबाजी करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उनकी भूमिका किसी भी तरह कम महत्वपूर्ण नहीं होगी। रोचक बात यह है कि बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज का प्रदर्शन और निखर जाता है। बुमराह के साथ गेंदबाजी करते हुए सिराज ने 29 टेस्ट में 90 विकेट लिए हैं और उनका औसत 32 रहा है। बुमराह की गैरमौजूदगी में उन्होंने 17 टेस्ट में 50 विकेट लिए हैं और उनका औसत 25.4 रहा है। सिराज को चुनौती पसंद है और वह दबाव से पीछे नहीं हटते। हैदराबाद के चारमीनार क्रिकेट क्लब में सिराज के मार्गदर्शक रहे मोहम्मद महबूब अहमद कहते हैं, ‘‘वह हमेशा से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा करने वाला खिलाड़ी रहा है। वह चुनौती से कभी पीछे नहीं हटता। टेनिस बॉल क्रिकेट से उन्हें इसकी आदत पड़ी, जहां लगातार कई ओवर गेंदबाजी करनी पड़ती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय टीम में आने के बाद उसने अपनी फिटनेस पर लगातार मेहनत की। वह दिन की पहली गेंद हो या आखिरी, उसी तीव्रता से गेंदबाजी कर सकता है। इस मामले में वह बिल्कुल नहीं बदला है।’’ इस टेस्ट श्रृंखला में सिराज की सबसे बड़ी ताकत उनकी यही आक्रामकता होगी। धीमी पिचों पर उन्हें ज्यादा मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। सिराज के पास हालांकि सपाट पिचों पर भी साधारण और अचानक चौंकाने वाली गेंदों का सही मिश्रण करके बल्लेबाजों को परेशान करने में सक्षम हैं। जरूरत के समय विकेट निकालने की उनकी खास क्षमता है। इसके अलावा निचले क्रम में बल्ले से तेज रन बनाने की उनकी क्षमता भी उन्हें उपयोगी खिलाड़ी बनाती है। हाल ही में कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच में हैदराबाद के इस खिलाड़ी ने लगातार तीन छक्के लगाकर भारत को जीत दिलाई थी। महबूब ने कहा, ‘‘सिराज बचपन से ही ऐसा था। उसे हार पसंद नहीं थी और वह हार स्वीकार भी नहीं करता था। जब टीम दबाव में होगी, तो वह आगे बढ़कर नेतृत्व करेगा।’’ भारतीय टीम के लिए श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सिराज तुरूप का इक्का साबित हो सकते हैं। भाषा आनन्द सुधीरसुधीर

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