पिता को दूध बेचते देख बुरा लगता है, उनकी मदद के लिए नौकरी की तलाश में हूं: आशीष

पिता को दूध बेचते देख बुरा लगता है, उनकी मदद के लिए नौकरी की तलाश में हूं: आशीष

पिता को दूध बेचते देख बुरा लगता है, उनकी मदद के लिए नौकरी की तलाश में हूं: आशीष
Modified Date: August 12, 2026 / 07:12 pm IST
Published Date: August 12, 2026 7:12 pm IST

(फोटो के साथ) … फिलेम दीपक सिंह …

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के रहने वाले 19 वर्षीय भाला फेंक खिलाड़ी आशीष यादव की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। प्रशिक्षण के लिए हिसार जाने से करीब 15 महीने पहले तक वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले स्थित अपने गांव में पिता के साथ दूध बेचते थे। आयु वर्ग की विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद भी वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए नौकरी की तलाश में हैं। आशीष अप्रैल 2025 में हिसार स्थित आईआईएस-एसएआई (भारतीय खेल प्राधिकरण) केंद्र पहुंचे थे, जहां उन्होंने कोच अरविंद कुमार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद उनके भाला फेंकने की दूरी में करीब 20 मीटर का सुधार हुआ। आशीष विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर इस स्पर्धा में पदक हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बन गए। उनसे पहले दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने 2016 में पोलैंड में आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था और 86.48 मीटर के साथ विश्व जूनियर रिकॉर्ड बनाया था, जो अब भी कायम है। आशीष की खेल उपलब्धियों में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति जस की तस बनी हुई है। आशीष ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) की ओर से आयोजित बातचीत में पीटीआई से कहा, ‘‘मेरे पिता दूध बेचते हैं। वह मिर्जापुर के हमारे गांव में दूध बेचकर परिवार चलाते हैं। मेरे पिता के छह भाई हैं। उनमें तीन सैनिक और तीन किसान हैं। जब मैं अपने पिता को दूध बेचते देखता हूं तो मुझे अच्छा नहीं लगता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं नौकरी तलाश रहा हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिली है। मैं हिसार में अच्छी तरह प्रशिक्षण लेकर कड़ी मेहनत करूंगा और देश के लिए पदक जीतने की कोशिश करूंगा। इसी प्रक्रिया में नौकरी मिलने की भी उम्मीद है। घर की आर्थिक स्थिति अभी भी वैसी ही है, क्योंकि मुझे नौकरी नहीं मिली है।’’ आशीष ने अपनी सफलता का श्रेय कोच अरविंद की देखरेख में मिले वैज्ञानिक प्रशिक्षण को दिया। वह इससे पहले गांव में लकड़ी के बने भाले से अभ्यास करते थे। आशीष ने बताया, ‘‘जब मैं अरविंद सर के पास गया, तब उनके साथ 60 मीटर तक भाला फेंकने वाले खिलाड़ी थे। मेरा लक्ष्य 70 मीटर तक पहुंचना था। कोच अरविंद के साथ छह महीने में मैंने अपनी दूरी 20 मीटर बढ़ा ली।’’ उन्होंने कहा कि जब वह हिसार आए थे, तब उन्हें तकनीक के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। कोच ने उनकी तकनीक सुधारी, मांसपेशियों पर काम कराया और उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया। आशीष के मुताबिक, ‘‘जब मैं यहां आया था तो मेरा वजन 68 किलो था, लेकिन अब मैं 85 किलो का हूं। यह अच्छी डाइट की वजह से हुआ है। हिसार केंद्र में अच्छा पोषण विशेषज्ञ भी है। गांव में रहते हुए मुझे डाइट और मांसपेशियां बनाने के बारे में कुछ पता नहीं था। जो भी उपलब्ध होता था, मैं वही खा लेता था।’’ आशीष दिग्गज ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की उपलब्धियों से प्रेरित रहे हैं। नीरज ने भी इस युवा खिलाड़ी को उसकी सफलता पर बधाई दी है। अपने आदर्श खिलाड़ी से मिलने को उत्सुक आशीष ने कहा, ‘‘मैं उनसे अभी तक नहीं मिला हूं। इतनी जल्दी उनसे कैसे मिल सकता हूं?’’ वह हालांकि नीरज से अपनी तुलना नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता कि मेरी तुलना उनसे की जाए। मैं ऐसा नहीं कर सकता। इसके बजाय मैं कड़ी मेहनत करना चाहता हूं। हमारे गांव में कोई भाला फेंकने वाला खिलाड़ी नहीं है। मुझे उम्मीद है कि मेरे गांव के लोग इस खेल को जानेंगे और इसे खेलना शुरू करेंगे।’’ भाषा आनन्द सुधीरसुधीर


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