नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) पिछले दो महीनों में चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सिंथेटिक (कृत्रिम) पंख वाली शटल का परीक्षण कर चुका है। महासंघ के महासचिव थॉमस लुंड ने बृहस्पतिवार को कहा कि सिंथेटिक उत्पाद अब शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए जरूरी मानकों के ‘काफी करीब’ पहुंच रहे हैं हालांकि इनके इस्तेमाल को लेकर कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
बीडब्ल्यूएफ के अनुसार इन शटल का परीक्षण टोयोटा फुकेट इंटरनेशनल चैलेंज 2026 (नौ-14 जून), एफजेड फोर्जा द्वारा प्रस्तुत वेलेंस एल्प्स इंटरनेशनल 2026 (11-14 जून), एफजेड फोर्जा फ्यूचर सीरीज नोवेल-अक्विटेन 2026 (दो-पांच जुलाई) और विक्टर आयरिश अंडर-19 ओपन 2026 (सात-नौ अगस्त) में किया गया।
इन प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय चैलेंज, फ्यूचर सीरीज और जूनियर अंतरराष्ट्रीय सीरीज जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि बीडब्ल्यूएफ शीर्ष स्तर से नीचे की विभिन्न श्रेणियों में सिंथेटिक शटल का परीक्षण कर रहा है।
शटल की उपलब्धता और सिंथेटिक विकल्पों पर चल रहे प्रयोग के बारे में पूछे जाने पर लुंड ने कहा कि मामला केवल आपूर्ति संकट तक सीमित नहीं है।
लुंड ने विश्व चैंपियनशिप के दौरान पत्रकारों से कहा, ‘‘यह बड़ा सवाल है और यह सिर्फ इस बात से कहीं अधिक जटिल है कि क्या कोई समस्या है। इस टूर्नामेंट और शीर्ष स्तर पर खेलने के लिए पर्याप्त संख्या में बेहद अच्छे शटल उपलब्ध हैं। लेकिन पिछले 30-40 वर्षों में बर्ड फ्लू जैसी समस्या ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इससे आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है।’’
बीडब्ल्यूएफ ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वह दो सिंथेटिक पंख वाले शटल विक्टर न्यू कार्बन सोनिक मैक्स और योनेक्स क्रॉसविंड 70 का परीक्षण करेगा। आंतरिक परीक्षण में इन उत्पादों का प्रदर्शन प्रतिस्पर्धी स्तर के लिए पर्याप्त पाए जाने के बाद वास्तविक प्रतियोगिताओं में इनके मूल्यांकन का फैसला किया गया था।
लुंड ने स्वीकार किया कि प्राकृतिक पंख वाले शटल के प्रदर्शन की बराबरी करने वाला सिंथेटिक शटल विकसित करना चुनौतीपूर्ण रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी कठिन काम है क्योंकि आप कोई चीज विकसित करते हैं और फिर पता चलता है कि उसमें एक पहलू बेहतर हुआ है, लेकिन किसी दूसरे पहलू में दो कदम पीछे चले गए। इस प्रक्रिया में उतार-चढ़ाव चलता रहता है।’’
लुंड ने कहा कि बीडब्ल्यूएफ निर्माताओं को ऐसे मुकाम तक पहुंचने में मदद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जहां बाजार में प्राकृतिक पंख वाले शटल के साथ-साथ सिंथेटिक विकल्प भी उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व चैंपियनशिप में इसका इस्तेमाल करने के लिए इसे बेहद ऊंचे मानकों पर खरा उतरना होगा। कुछ उत्पाद इन मानकों के काफी करीब पहुंच रहे हैं और यह बेहद प्रभावशाली है।’’
लुंड ने कहा कि बीडब्ल्यूएफ को उम्मीद है कि सिंथेटिक पंख वाले शटल का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल होने से भविष्य में कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
बीडब्ल्यूएफ ने कहा कि परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिंथेटिक शटल मौजूदा प्रतियोगिता मानकों के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं। इसके लिए निर्माताओं के प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों के साथ वास्तविक मुकाबलों में खिलाड़ियों, तकनीकी अधिकारियों और आयोजकों से मिली प्रतिक्रिया का भी आकलन किया जा रहा है।
समयसीमा को लेकर महासंघ ने कहा कि व्यापक स्तर पर इस्तेमाल के लिए फिलहाल कोई निश्चित योजना नहीं है।
बीडब्ल्यूएफ ने एक अलग बयान में कहा, ‘‘कोई निश्चित समयसीमा नहीं है। आगे की प्रगति पूरी तरह इन परीक्षणों के नतीजों पर निर्भर करेगी, जिसमें प्रदर्शन संबंधी आंकड़े और खिलाड़ियों की स्वीकृति दोनों शामिल हैं।’’
महासंघ ने कहा, ‘‘हम तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे जब तक हमें पूरा विश्वास नहीं हो जाता कि शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं के मानकों को बनाए रखा जा सकता है। यह कोई त्वरित बदलाव नहीं है, बल्कि सावधानीपूर्वक प्रबंधित दीर्घकालिक विकास की प्रक्रिया है।’’
महासंघ ने खिलाड़ियों के बीच मौजूद संदेह को भी दूर करने का प्रयास किया है। कई खिलाड़ी प्राकृतिक पंख वाले शटल से खेलते हुए बड़े हुए हैं और उसके इस्तेमाल के आदी हैं।
बीडब्ल्यूएफ ने कहा, ‘‘बीडब्ल्यूएफ समझता है कि संदेह स्वाभाविक है। इसी वजह से इसे धीरे-धीरे और सीमित दायरे में इसे लागू किया जा रहा है। मूल्यांकन प्रक्रिया आंकड़ों पर आधारित और पारदर्शी होगी तथा इसमें खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया को लगातार केंद्रीय भूमिका दी जाएगी। यह पहल बदलाव थोपने के बारे में नहीं, बल्कि परीक्षण, सीखने और लगातार सुधार के बारे में है।’’
बीडब्ल्यूएफ के अनुसार सिंथेटिक शटल का उद्देश्य प्राकृतिक सामग्री पर निर्भरता कम करने और खेल को अधिक सुलभ बनाने में मदद करना है, ना कि प्राकृतिक पंख वाले शटल को पूरी तरह हटाना।
महासंघ ने कहा, ‘‘लक्ष्य केवल पंख वाले शटल को बदलना नहीं है, बल्कि खेल की मूल भावना और मानकों को बनाए रखते हुए एक व्यवहार्य और टिकाऊ विकल्प उपलब्ध कराना है।’’
सुधीर नमिता
नमिता