(हार्दिक शर्मा)
नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) बचपन से ही लड़ाकू खेलों के प्रति आकर्षित और जॉर्जिया के दो बार के ओलंपिक चैंपियन लाशा बेकौरी से प्रेरित भारतीय जूडो खिलाड़ी हर्ष टोकस ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में इस खेल में देश का पहला स्वर्ण पदक जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह 23 वर्षीय खिलाड़ी पुरुषों के 81 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेगा। वह 10 वर्ष की उम्र में ही जूडो से जुड़ गए थे और उन्होंने अपना शुरुआती प्रशिक्षण दिल्ली के मुनीरका गांव में एक अकादमी में लिया था।
टोकस ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं लगभग 12 साल पहले 10 या 11 वर्ष की उम्र में जूडो से जुड़ गया था। मुझे बचपन से ही लड़ाकू खेलों में रुचि थी। मेरे घर के पास एक जूडो अकादमी थी और मुझे वहां का माहौल बहुत अच्छा लगता था। मुझे प्रतिस्पर्धा करना और खुद को चुनौती देना पसंद था और यहीं से मेरे जूडो करियर की शुरुआत हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा बस एक ही लक्ष्य है स्वर्ण पदक जीतना। मैं अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहता हूं और सबको गौरवान्वित करना चाहता हूं।’’
राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार भाग लेने के बावजूद टोकस का कहना है कि वह किसी भी तरह का दबाव महसूस नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी प्रकार का दबाव महसूस नहीं कर रहा हूं। अगर आपने अच्छी तैयारी की है तो फिर आप पर दबाव नहीं होता। मैंने पिछले तीन-चार महीनों में बहुत अच्छी तैयारी की है। मैं पदक जीतना चाहता हूं। पदक जीतना मेरा सपना है और इसके लिए मैं अपना सब कुछ झोंक दूंगा।’’
बचपन से बेकौरी का अनुसरण करने वाले टोकस ने कहा कि जॉर्जिया में अभ्यास के दौरान जॉर्जियाई ओलंपिक चैंपियन से मिलना एक यादगार अनुभव था। भारतीय खिलाड़ी ने इस दिग्गज खिलाड़ी से अपनी तकनीक में सुधार करने के लिए सुझाव मांगा था।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी प्रेरणा जॉर्जियाई जूडो खिलाड़ी लाशा बेकौरी हैं, जो ओलंपिक चैंपियन हैं। मैं उनसे जॉर्जिया में मिला था। उनकी शैली मुझे बेहद पसंद है और वह मेरे पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक हैं।’’
भाषा
पंत सुधीर
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