(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) तोक्यो ओलंपिक से पहले जब भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों ने फिटनेस के लिये मिठाई, चॉकलेट, फास्ट फूड छोड़ा था तब ट्रेनर को उन पर नजर रखनी पड़ती थी लेकिन अब विश्व कप और एशियाई खेलों में अच्छे प्रदर्शन को बेताब खिलाड़ियों ने खुद ही इन चीजों से तौबा कर ली है, यह कहना है भारतीय हॉकी की दीवार सविता पूनिया का ।
तोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम ने फिटनेस के लिये मिठाई, केक, चॉकलेट , मसालेदार खाने से किनारा कर लिया था । वही ट्रेनर वेन लोम्बार्ड टीम के साथ हैं और फिटनेस को लेकर वही अनुशासन जारी है ।
भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ तोक्यो ओलंपिक के समय भी वेन लोम्बार्ड ही ट्रेनर थे जो जितने अच्छे ट्रेनर हैं, उतने ही कुछ चीजों को लेकर सख्त भी हैं । उन्होंने फिटनेस को लेकर काफी ऊंचे मानदंड रखे हैं । उनका मानना है कि आपके भीतर से इच्छा होनी चाहिये कि कुछ हासिल करने के लिये कुछ कुर्बानी देनी होगी ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ उन्होंने सबसे पहले चीनी बंद करवाई , मीठा या फास्ट फूड किचन में होता ही नहीं था । अभी भी कुछ नहीं बदला है । पिछले दिनों न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने के बाद विजेता टीम के लिये केक मंगवाया था लेकिन हम सभी हंस रहे थे कि खाना तो है नहीं ।’’
भारत के लिये 300 से अधिक मैच खेल चुकी सविता ने कहा ,‘‘ ये चीजें प्रेरित करती है क्योंकि आपको अहसास रहता है कि अच्छा खेलने के लिये आपने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ी हैं ,परिवार से दूर रहे हैं या थकान से चूर होने पर भी अभ्यास किया है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ तोक्यो से अब तक में यह बदलाव है कि उस समय वेन को नजर रखनी पड़ती थी कि कोई खा तो नहीं रहा है लेकिन अब सभी खुद ही परहेज रखते हैं । नजर नहीं रखनी पड़ती । अब मिठाई लॉस एंजिलिस ओलंपिक के बाद ही खायेंगे ।’’
विश्व कप के लिये टीम को पूरी तरह से तैयार बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य कोच शोर्ड मारिन और सहयोगी स्टाफ ने हर खिलाड़ी पर इतनी मेहनत की है कि अब वे पोडियम पर रहकर उन्हें ‘रिटर्न गिफ्ट’ देना चाहते हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘शोर्ड बहुत डिमांडिंग कोच हैं और उन्हें हारना पसंद नहीं है । वह हर मैच को चुनौती की तरह लेते हैं और उनका वही दबाव हमसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराता है । वेन, रोडे, कियारा और मार्टिन सभी व्यक्तिगत स्तर खिलाड़ियों की रिकवरी, डाइट हर चीज का इतना ध्यान रखते हैं । ताइके ताकेमा ने ड्रैग फ्लिक के साथ डिफेंस पर भी काम किया है ।अब हम पर है कि पोडियम पर रहकर इन सभी को रिटर्न गिफ्ट दें।’’
उन्होंने कहा कि नेशंस कप जीतने से टीम का मनोबल बढा है और नजरें विश्व कप, एशियाड से आगे ओलंपिक पर भी है ।
पद्मश्री से नवाजी गई दूसरी महिला हॉकी खिलाड़ी सविता ने कहा ,‘‘नेशंस कप जीतने से काफी मनोबल बढा है क्योंकि वह बहुत अहम टूर्नामेंट था । लॉस एंजिलिस ओलंपिक जीतने के लिये प्रो लीग में लौटना बहुत जरूरी था जिसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों के साथ 16 मैच खेलने को मिलेंगे ।’’
विश्व कप और एशियाई खेलों में भारत को चीन का सामना करना है जो जबर्दस्त फॉर्म में है और सविता ने कहा कि उसके खिलाफ पीसी डिफेंस पर अधिक काम करना होगा ।
उन्होंने कहा,‘‘ विश्व कप में हर मैच अहम है और हम मैच दर मैच रणनीति बनायेंगे । इंग्लैंड और चीन अच्छी टीमें हैं और चीन से हमें एशियाई खेलों में भी खेलना है । पिछले मैचों में उसके खिलाफ हमने पेनल्टी कॉर्नर गोल गंवाये हैं तो पीसी डिफेंस अच्छा रखना है ।’’
विश्व कप से पहले हर तरफ भारतीय पुरूष टीम को 50 साल बाद पदक का प्रबल दावेदार बताया जा रहा है लेकिन महिला टीम की उतनी चर्चा अक्सर नहीं होती । सविता ने हालांकि कहा कि पिछले दो ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी भारतीय पुरूष हॉकी टीम के प्रदर्शन से महिला टीम को भी खुद को साबित करने की प्रेरणा मिलती है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ जब हम तोक्यो ओलंपिक में गए थे तो हमारे अलावा किसी को हमसे उम्मीद नहीं थी । हमें पता था कि हम अच्छा खेलेंगे । पुरूष टीम अच्छा खेलती आई है और आज भी खेल रही है और हम इससे प्रेरणा लेते हैं । ओलंपिक में लगातार दो पदक जीतना हॉकी के लिये गर्व का पल है और वह गर्व हम भी अपनी टीम को, परिवार को, देश को महसूस कराना चाहते हैं ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ हम एक दूसरे को प्रेरित करते हैं कि हमसे भले ही उतनी उम्मीद नहीं है लेकिन हम इतनी मेहनत कर रहे हैं, परिवार से दूर हैं, दर्द और चोटों की परवाह किये बिना मेहनत कर रहे हैं तो किसलिये । जीतने के लिये ही ना और यह हमारे लिये प्रेरणा का काम करती है ।’’
राष्ट्रीय शिविर बेंगलुरू में ही होने के कारण उन्हें पुरूष टीम से सीखने का मौका भी मिलता है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ चूंकि बेंगलुरू में साथ में एक ही मैदान पर अभ्यास करते हैं तो आपस में अनुभव भी साझा करते हैं । जैसे अमित रोहिदास पीसी में फर्स्ट रशर बहुत अनुभवी है तो उनसे टिप्स लेते हैं।’’
भाषा
मोना पंत
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