त्रीसा-गायत्री ने विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक से आलोचकों को जवाब दिया
त्रीसा-गायत्री ने विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक से आलोचकों को जवाब दिया
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने रविवार को कहा कि आलोचकों को सबसे अच्छा जवाब अपने प्रदर्शन से देना है और भारतीय महिला युगल जोड़ी ने विश्व चैंपियनशिप में अपना पहला कांस्य पदक जीतकर इसका शानदार जवाब दिया।
गैर वरीय भारतीय जोड़ी शनिवार को सेमीफाइनल में दुनिया की शीर्ष नंबर की जोड़ी और मौजूदा चैंपियन चीन की लियू शेंग शू और तान निंग से हार गई, लेकिन कांस्य पदक जीतने में सफल रही।
त्रीसा ने कहा, ‘‘हमें लोगों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि हम कौन हैं या क्या कर सकते हैं। हमारे नतीजे ही हमारे बारे में बता सकते हैं। आखिरकार हमने वही करके दिखाया। ’’
त्रीसा अप्रैल में टखने की चोट से जूझ रही थीं और कई महीनों तक कोर्ट से दूर रही थीं। इसलिए इस टूर्नामेंट से उनसे और गायत्री से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। लोगों का ध्यान मुख्य रूप से पीवी सिंधू, आयुष शेट्टी के अलावा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी पर था।
त्रीसा ने कहा, ‘‘नकारात्मक बातें हमेशा होती रहेंगी। लेकिन अगर आप उन्हें अपने दिमाग पर हावी होने देंगे तो आप अपने वर्तमान पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। हम दोनों यहां कुछ बड़ा करने आए थे और हमें बस यह दिखाना था कि हम कुछ बड़ा कर सकते हैं। हमने ऐसा किया। ’’
गायत्री के लिए यह पदक भावनाओं से भरे शानदार सप्ताह का अंत रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत शानदार, भावुक और यादगार सप्ताह रहा। हम कांस्य पदक जीतकर बहुत खुश हैं। हम इस पदक को हमेशा याद रखेंगे। ’’
उन्होंने बताया कि क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद भी वे बहुत खुश थीं और सेमीफाइनल में भी उन्होंने अपना शतक प्रतिशत दिया, लेकिन दिन उनका नहीं था।
अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के बारे में पूछे जाने पर दोनों ने बताया कि उन्होंने आइसक्रीम खाई। हालांकि, पदक की याद में टैटू बनवाने की उनकी कोई योजना नहीं है।
दुनिया की 39वें नंबर की इस जोड़ी ने सेमीफाइनल तक पहुंचने के रास्ते में तीन वरीयता प्राप्त जोड़ियों को हराया। इसके साथ ही उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भारत के महिला युगल पदक के 15 साल के इंतजार को खत्म किया। इससे पहले ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने 2011 में कांस्य पदक जीता था।
चीन की कई मजबूत जोड़ियों को हराने के बाद त्रीसा ने बताया कि सफलता की कुंजी प्रतिद्वंद्वी को आसान अंक नहीं देना और महत्वपूर्ण मौकों पर अपना धैर्य बनाए रखना है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ लगातार दो अंक गंवा देते हैं तो वे मैच पर पकड़ बना लेते हैं और अपनी लय जारी रखते हैं। इसलिए हमें उन मौकों पर खुद को संभालना होगा। ’’
लियू और तान के खिलाफ त्रीसा-गायत्री का रिकॉर्ड 1-7 है। इसके बावजूद त्रीसा को भरोसा है कि दुनिया की नंबर एक जोड़ी को हराना अब सिर्फ समय की बात है।
उन्होंने कहा, ‘‘शत प्रतिशत। उनके खिलाफ हारना अच्छा नहीं लगता, लेकिन मुझे लगता है कि यह सिर्फ समय की बात है। हम उन्हें हरा सकते हैं। जब भी हमने उनके खिलाफ खेला है, मुकाबला अक्सर निर्णायक गेम तक गया है। इससे हमें आत्मविश्वास मिलता है कि हम दुनिया की नंबर एक जोड़ी के खिलाफ भी मुकाबला कर सकते हैं। बस खुद पर विश्वास रखना है कि हम उन्हें हरा सकते हैं। ’’
भाषा नमिता आनन्द
आनन्द

Facebook


