Vaibhav Suryavanshi Team India: ‘भले किसी भी बड़े खिलाड़ी को बाहर करो, लेकिन वैभव सूर्यवंशी के लिए टीम इंडिया में जगह बनाओ’.. इस महान खिलाड़ी ने की पैरवी, ये सवाल भी पूछा
Vaibhav Suryavanshi in Team India: अगर आप टी20 अंतरराष्ट्रीय में वैभव को अभी नहीं खिलाते, तो उसे कब मौका देंगे?: गावस्कर
Vaibhav Suryavanshi in Team India || Image- ESPN Cricket
- गावस्कर ने वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भगवान का उपहार बताया।
- इंग्लैंड टी20 दौरे के लिए चयन की मांग की गई।
- आईपीएल में 29 गेंदों पर 97 रन की विस्फोटक पारी खेली।
नयी दिल्ली: महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर का मानना है कि युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के लिए भगवान का उपहार हैं और उन्हें इंग्लैंड के आगामी सफेद गेंद के दौरे के लिए टीम में चुना जाना चाहिए, भले ही इसके लिए अंतिम एकादश में शीर्ष क्रम के किसी स्थापित बल्लेबाज को बाहर करना पड़े। (Vaibhav Suryavanshi in Team India) गावस्कर ने आईपीएल एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ सूर्यवंशी की 29 गेंद में 97 रनों की शानदार पारी देखी थी और वह इस किशोर खिलाड़ी के निडर स्ट्रोकप्ले से बेहद प्रभावित हैं, खासकर जिस तरह से उन्होंने पैट कमिंस की गेंद पर सीधा छक्का जड़ा।
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गावस्कर ने पूछा, “उन्हें मौका कब देंगे?”
गावस्कर ने यूट्यूब शो ‘स्पोर्ट्स तक’ पर कहा, ‘‘2026 को वैभव सूर्यवंशी के साल के तौर पर याद किया जाएगा। वह (सूर्यवंशी) टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए तैयार हैं। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इंग्लैंड के दौरे पर होने वाली टी20 सीरीज के लिए उन्हें चुना जाएगा। मेरा मतलब है कि इस शानदार प्रदर्शन के बाद वह टीम में चुने जाने के हकदार हैं। अगर आप इस प्रदर्शन के बाद उन्हें मौका नहीं देते, तो उन्हें मौका कब देंगे? ’’ भारत के पूर्व कप्तान को पूरा यकीन है कि उम्र कोई मायने नहीं रखनी चाहिए क्योंकि वह महज 15 साल की उम्र में ही हर तरह के गेंदबाजों की धुनाई कर रहे हैं।
गावस्कर ने कहा, ‘‘उनकी उम्र पर मत जाइए। वह उन गेंदबाजों को धुन रहा है जो उससे उम्र में बड़े हैं। बल्कि 15 साल की उम्र में वह ऐसे गेंदबाजों को मार रहा है जिनके पास 15 साल का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। जरा उसके निडर अंदाज को देखिए। ’’ हालांकि अंतिम एकादश में सूर्यवंशी को जगह देने के लिए टीम प्रबंधन को अभिषेक शर्मा या संजू सैमसन में से किसी एक को बाहर बिठाना पड़ेगा। गावस्कर ने कहा, ‘‘हां, यह एक मुश्किल फैसला होगा कि किसे बाहर किया जाए। लेकिन यह एक अच्छी मुश्किल है। जब आपके सामने यह विकल्प हो कि किसे बाहर किया जाए, तो यह आपके देश में मौजूद प्रतिभा की गहराई को दिखाता है।’’
“वह सिर्फ खास नहीं है, बल्कि बहुत-बहुत ज्यादा खास है” : गावस्कर
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उसे (सूर्यवंशी को) 15 या 16 खिलाड़ियों की टीम में रखा जाएगा, लेकिन वह अंतिम एकादश में होंगा या नहीं, इसका फ़ैसला बाद में किया जा सकता है। लेकिन उस ड्रेसिंग रूम में रहकर उसे जो अनुभव मिलेगा, वह अनमोल होगा। (Vaibhav Suryavanshi in Team India) ’’ गावस्कर को लगता है कि जो लड़का सीधे छक्के मारता है, वह किसी भी तरह से ‘स्लॉगर’ (बिना सोचे-समझे मारने वाला खिलाड़ी) नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने जो देखा और जब मैं उसकी पिछली कुछ पारियों को भी ध्यान में रखता हूं, तो वह कुछ अलग ही था। वह सिर्फ खास नहीं है, बल्कि बहुत-बहुत ज्यादा खास है। ’’
गावस्कर ने कहा, ‘‘जब हम छक्के मारने वाले खिलाड़ियों के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मन में एक ‘स्लॉगर’ की छवि बनती है। लेकिन यह लड़का सीधे छक्के मारता है, लांग ऑन और लांग ऑफ के ऊपर से, और वह भी पूरी तकनीकी कुशलता के साथ। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘और जब कोई गेंदबाज उसे शॉर्ट गेंदें डालता है तो वह गेंद की लाइन में आकर उसे इतनी सफ़ाई से ‘हुक’ और ‘पुल’ करता है कि ऐसा नजारा बहुत कम देखने को मिलता है। सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ियों को छोड़कर बाकी सभी लोग तब दुखी हो गए थे, जब वह 97 रन पर आउट हो गया और सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड बनाने से चूक गया। सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के लिए भगवान का दिया हुआ एक उपहार है। ’’
‘अंदर का बचपन कभी खत्म नहीं हो’ :गावस्कर
गावस्कर ने सचिन तेंदुलकर को 15 साल की उम्र में मुंबई के लिए खेलते हुए देखा था और उन्होंने इन दोनों के बीच कोई सीधी तुलना नहीं की। उन्होंने कहा, ‘‘सचिन में वे सभी गुण मौजूद थे। वह आक्रामक भी हो सकता था और रक्षात्मक भी खेल सकता था। उसके पास क्रिकेट की किताब में मौजूद हर तरह के शॉट थे। उसका संतुलन बिल्कुल ही अलग था। जब मैंने उसे पहली बार देखा था तो मुझे लगा था कि वह भी भारतीय क्रिकेट के लिए भगवान का ही एक तोहफा है। (Vaibhav Suryavanshi in Team India) ’’ गावस्कर ने कहा, ‘‘बल्ले अब काफी अलग होते हैं। जिस जमाने में सचिन खेला करते थे, उस समय के बल्ले अलग होते थे और उतने ज्यादा शक्तिशाली नहीं होते थे। आज के जमाने में जिस तरह के बल्ले मिलते हैं, वैसे ही बल्लों की जरूरत होती है, ताकि आप इस तरह के जोरदार छक्के मार सकें। ’’
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गावस्कर उस समय काफ़ी भावुक हो गए थे, जब मैच से पहले के अभ्यास के दौरान सूर्यवंशी उनके पास आया और उसने उनके पैर छुए। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी परवरिश हमें यही सिखाती है कि हमें अपने बड़ों का आदर करना चाहिए। सिर्फ मैंने ही नहीं, बल्कि संजय बांगड़ भी मेरे साथ ही खड़े थे और सूर्यवंशी ने उनके भी पैर छुए। शायद उसे उम्मीद थी कि मैं उससे कुछ कहूंगा, और मैंने उससे कहा, ‘लगे रहो’। ’’ तो आखिर गावस्कर को इस लड़के से क्या उम्मीदें हैं? तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘‘मैं तो यही चाहता हूं कि इस लड़के के अंदर का बचपन कभी खत्म नहीं हो। ’’
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