Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026: 20 साल कैद…25 लाख रुपए तक जुर्माना, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण करवाने वालों की खैर नहीं, साय सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026: 20 साल कैद...25 लाख रुपए तक जुर्माना, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण करवाने वालों की खैर नहीं

Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026: 20 साल कैद…25 लाख रुपए तक जुर्माना, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण करवाने वालों की खैर नहीं, साय सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026: 20 years in prison... fines up to ₹25 lakh; those facilitating religious conversions in Chhattisgarh will face strict consequences—Sai government takes a major decision. /Image: AI-generated

Modified Date: July 16, 2026 / 11:16 am IST
Published Date: July 16, 2026 11:16 am IST
HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है
  • बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान
  • सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है

रायपुर। Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026: प्रदेश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर सरकार सख्त हो गई और धर्मांतरण रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है, साय सरकार ने प्रदेश में धर्मांतरण रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 को लागू कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।

नए कानून में किसी भी प्रकार के बल, लालच, धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन (Religious Conversion Law) कराने पर 7 से 10 साल की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है। पीड़ित अगर महिला, नाबालिग, SC/ST/OBC होने पर 10 से 20 साल तक की कड़ी सजा होगी। सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक और 25 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026 नए कानून के मुताबिक, धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा। सिर्फ धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को शून्य घोषित करने का भी प्रावधान भी है। इसके आलावा हर जिले में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी, जो 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करेगी। इस नए क़ानून के तहत ना सिर्फ़ धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वाले पुजारी, मौलवी या अन्य धार्मिक व्यक्ति को भी प्रशासनिक अधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।

ये भी पढ़ें


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.