मुल्लांपुर, आठ जून (भाषा) अफगानिस्तान के मुख्य कोच रिचर्ड पाइबस का मानना है कि भारत के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में उनकी टीम का रवैया काफी ‘नादानी’ भरा था और उन्होंने मेजबान टीम के खिलाफ करारी हार की वजह इस प्रारूप में खेलने का अधिक अनुभव और समय नहीं मिलने को बताया।
पिछले आठ वर्षों में अफगानिस्तान का यह सिर्फ 12वां टेस्ट मैच था और भारत के हाथों पारी और 300 रन से मिली हार टीम के लिए एक सबक की तरह रही।
इंग्लैंड के अनुभवी कोच पाइबस ने कहा कि वह अफगानिस्तान क्रिकेट के आला अधिकारियों से इस बारे में बात करना चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट के प्रति टीम की प्रतिबद्धता का स्तर क्या है।
निराश पाइबस ने मैच के बाद कहा, ‘‘आप जानते हैं कि कुछ नीतिगत सवाल हैं। जब मैं वापस जाऊंगा तो बोर्ड को प्रतिक्रिया दूंगा। लेकिन साथ ही सवाल यह भी है कि टेस्ट क्रिकेट के प्रति हमारी क्या प्रतिबद्धता है?’’
अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लाल गेंद के दो मैच के बीच इतना लंबा अंतर रहता है तो टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाने का नुकसान अफगानिस्तान को होता रहेगा।
पाइबस ने कहा, ‘‘प्रथम श्रेणी क्रिकेट में काफी अधिक कोचिंग करने के बाद यह कुछ-कुछ सत्र पूर्व माहौल की तरह है। आपको लंबे प्रारूप वाले क्रिकेट को खेलने के लिए लय में आना होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम लय में नहीं थे। हमने नादानी दिखाई और अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।’’
इसके बाद अक्सर चर्चा में रहने वाला मुद्दा सामने आया जो अनुभव की कमी और देश की सीमित ओवरों की टीम से तुलना है।
पाइबस ने कहा, ‘‘आप स्वदेश में घरेलू स्तर पर कितना भी लाल गेंद का क्रिकेट खेल लें लेकिन आपको पता है कि वहां बहुत अधिक प्रथम श्रेणी टीम नहीं हैं और मुकाबलों की सूची भी लंबी नहीं होती।’’
राशिद खान, नूर अहमद और अल्लाह गजनफर जैसे सीमित ओवरों के अफगानिस्तान के कुछ स्टार खिलाड़ी लाल गेंद का क्रिकेट नहीं खेलते। पाइबस ने किसी का नाम लिए बिना माना कि यह एक समस्या है।
उन्होंने कहा, ‘‘सीमित ओवरों की टीम में कई ऐसे स्टार हैं जो असल में विश्व क्रिकेट के बड़े नाम हैं। वे प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं। इससे युवा खिलाड़ियों को मदद नहीं मिलती। इतिहास गवाह है कि जैसे-जैसे कोई टीम आगे बढ़ती है उसे खेलने के लिए अधिक मुकाबलों की जरूरत होती है।’’
हालांकि अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों को दो से अधिक टी20 लीग खेलने से रोक दिया है, लेकिन व्यावसायिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसे लागू करना आसान नहीं है।
भाषा सुधीर आनन्द
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