पारंपरिक कला और आधुनिक विविधताओं के अनोखे संगम से भुवनेश्वर दे रहे हैं बल्लेबाजों को मात
पारंपरिक कला और आधुनिक विविधताओं के अनोखे संगम से भुवनेश्वर दे रहे हैं बल्लेबाजों को मात
… जी उन्नीकृष्णन …
अहमदाबाद, 29 मई (भाषा) शुभमन गिल आगे बढ़कर भुवनेश्वर कुमार की गेंद को बाउंड्री के पार भेजने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन अच्छी लेंथ से थोड़ी-सी अंदर आती गेंद ने उनका संतुलन बिगाड़ दिया और गुजरात टाइटंस के कप्तान के स्टंप्स बिखेर दिए। यह इस आईपीएल सत्र का साधारण दिखने वाला, लेकिन प्रभावी विकेटों में से एक था। धर्मशाला में खेले गए क्वालीफायर एक का वह मात्र 10 सेकंड का क्षण भुवनेश्वर कुमार के गेंदबाजी कौशल को पूरी तरह समेटे हुए था। इसमें पुरानी शैली का कौशल, न्यूनतम प्रयास और फिर भी अत्यंत प्रभावी परिणाम देने वाली कला शामिल थी। यह 36 वर्षीय तेज गेंदबाज इस सत्र में पर्पल कैप की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने आठ की इकॉनमी रेट से 26 विकेट हासिल किए हैं। खास बात यह है कि पावरप्ले में उन्होंने 12 विकेट लेकर विपक्षी टीमों की शुरुआत ही बिगाड़ दी और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को लगातार दूसरी बार फाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भुवनेश्वर का यह प्रदर्शन उनके करियर में आए अद्भुत परिवर्तन को दर्शाता है। उन्हें कम गति के कारण टी20 प्रारूप में प्रभावी नहीं माना जाता था, लेकिन वह अब इस लीग के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज़ बन चुके हैं। उनके नाम 222 विकेट दर्ज हैं। आरसीबी के गेंदबाजी कोच ओंकार साल्वी के अनुसार, ‘‘हर कोई जानता है कि वह एक विश्वस्तरीय गेंदबाज है और उसके पास किस स्तर की कौशल क्षमता है। हर गेंदबाज़ की अपनी-अपनी ताकत होती है और टीमें उसी के अनुसार योजना बनाती हैं। भुवी नई गेंद से गेंदबाज़ी करते हुए स्विंग का पूरा लाभ उठाने की कोशिश करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह आखिरी ओवरों में अपनी विविधताओं का प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस चरण में गेंदबाज़ी कर रहे हैं।’’ भुवनेश्वर कुमार के पास विविधताओं का भरपूर भंडार है और हाल के समय में उन्होंने अपनी तरकश में एक बेहद उपयोगी यॉर्कर भी जोड़ लिया है, जिससे आखिरी ओवरों में उन्हें खेलना और भी कठिन हो गया है। उन्होंने पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान से प्रेरित होकर ‘नकल बॉल’ विकसित की, जो बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। उनकी इस गेंद की गति में अचानक कमी आने से बल्लेबाज अक्सर चकमा खा जाते हैं। रोहित शर्मा जैसे दिग्गज बल्लेबाज़ भी इसका अनुभव कर चुके हैं, जब एक 116 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी गई वाइड नकल बॉल ने उनके बल्ले का किनारा लिया और विकेटकीपर जितेश शर्मा के दस्तानों में समा गई। भुवनेश्वर ने ‘जियोहॉटस्टार’ से कहा, ‘‘इस गेंद के इस्तेमाल के पीछे पूरी योजना होती है और यह कभी भी बिना सोच-विचार के नहीं फेंकी जाती। यह पिच की स्थिति और गेंद के व्यवहार पर निर्भर करता है। शुरुआती ओवरों में अगर स्विंग या सीम मिल रही हो तो वह उसका पूरा लाभ उठाते हैं, और अगर पिच धीमी हो और गेंद रुककर आए तो वह नकल बॉल का उपयोग करते हैं।’’ भारत के पूर्व तेज गेंदबाज और भुवनेश्वर के साथ काफी गेंदबाजी कर चुके प्रवीण कुमार ने कहा, ‘‘वह लगातार सीखते रहते हैं और अपनी गेंदबाज़ी में नए पहलू जोड़ते जाते हैं। उनकी गेंद अब 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के करीब पहुंच रही है, जबकि पहले यह उनकी ताकत नहीं थी। अब वे उन परिस्थितियों में बल्लेबाज़ को गति से भी मात देने में सक्षम हैं, जहां अधिक गति वाली गेंदबाजी कारगर साबित होती है।’’ रविवार को खेले जाने वाले आईपीएल फाइनल में आरसीबी का लगातार दूसरी बार खिताब जीतना भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाजी पर काफी कुछ निर्भर करेगा। भाषा आनन्द नमितानमिता

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