ज्वेरेव टेनिस में सफलता के साथ मधुमेह के प्रति फैला रहे जागरूकता
ज्वेरेव टेनिस में सफलता के साथ मधुमेह के प्रति फैला रहे जागरूकता
लंदन, 12 जुलाई (एपी) विम्बलडन पुरुष एकल फाइनल में जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव के सामने चुनौती सिर्फ गत चैंपियन और विश्व नंबर एक यानिक सिनर की ही नहीं है।
ज्वेरेव ‘टाइप-1 डायबिटीज’ (मधुमेह) जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे हैं जिसके बावजूद वह लगातार शीर्ष स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
फ्रेंच ओपन चैंपियन 29 साल के ज्वेरेव लगातार दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के इरादे से कोर्ट पर उतरे हैं। मैच के दौरान उन्हें अपने रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। जरूरत पड़ने पर वह कोर्ट पर चेंजओवर के दौरान अपनी जांघ में इंसुलिन का इंजेक्शन भी लगाते हैं।
ज्वेरेव ने वर्ष 2022 में पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्हें चार वर्ष की उम्र में टाइप-1 डायबिटीज का पता चला था। इससे पहले उन्होंने इस बीमारी को निजी रखा था। मैच के दौरान यदि इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती थी तो वह बाथरूम ब्रेक के दौरान ऐसा करते थे।
बीमारी का खुलासा करने के साथ ही उन्होंने एक फाउंडेशन की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की मदद करना है।
ज्वेरेव ने कहा, ‘‘अगर मेरी फाउंडेशन या मैं एक खिलाड़ी के रूप में किसी एक बच्चे या उसके परिवार की भी मदद कर सकूं तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए कोई नहीं होगी। दुनिया में कई महान खिलाड़ी, अभिनेता और संगीतकार हैं जो डायबिटीज के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह साबित करता है कि इस बीमारी के बावजूद किसी के सपनों की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।’’
ऑल इंग्लैंड क्लब ने ज्वेरेव को ग्रैंड स्लैम मुकाबलों के दौरान मोबाइल फोन रखने की विशेष अनुमति दी है। उनके शरीर पर लगा ग्लूकोज सेंसर सीधे मोबाइल पर ब्लड शुगर की जानकारी भेजता है, जिससे उन्हें बार-बार उंगली से रक्त जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ती। सामान्य परिस्थितियों में खिलाड़ियों को कोर्ट पर मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं होती।
‘टाइप-1 डायबिटीज’ को पहले ‘जुवेनाइल डायबिटीज’ भी कहा जाता था, क्योंकि यह बीमारी प्रायः बच्चों और किशोरों में सामने आती है। ‘इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन’ के अनुसार दुनिया भर में करीब 9.2 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं।
एपी आनन्द नमिता
नमिता

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