भोपाल गैस त्रासदी के 33 साल बाद भी वो काली रात का मंज़र आज भी लोगों के ज़हन में जिंदा है. 2 दिसंबर की रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री ने निकली ज़हरीली गैसों ने करीब 15 हज़ार लोगों की जिंदगी छीन ली थी.
इस त्रासदी ने भोपाल में इंसानों की वजूद को जानवरों से भी बदतर बना दिया था. इंसानी लाशे सड़कों पर पड़ी रहती थी, और वाहन उन्हें कुचलते हुए निकलते थे.
ये भी पढ़ें- तमिलनाडु और केरल में ओखी चक्रवात से तबाही, नेवी ने मछुआरों को सुरक्षित निकाला
भोपालवासी अब भी इस त्रासदी से उबर नहीं पाए हैं और वो आजतक इससे जूझ रहे हैं. गैस पीड़ित कई लोगों के जन्म लेने वाले बच्चे यहां निशक्तता का दंश झेल रहे हैं.
ये भी पढ़ें- शीतकालीन सत्र में ट्रिपल तलाक पर सरकार बना सकती है कानून
भीषण हादसे को याद करके आज भी लोगों के दिल दहल जाते हैं और आंखें भर आती है. इतने वर्षों बाद भी गैस पीड़ित उचित न्याय और सहायता की आस लगाये बैठे हैं.
ये भी पढ़ें- जानिए किस बुरी वजह से देश में नंबर वन है मध्य प्रदेश
80 साल की गैस पीड़ित भूरी बाई का कहना है कि सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन से किसी तरह गुजारा हो जाया करता था, लेकिन अब तो सरकार ने पेंशन ही बंद कर दी है. सरकार गैस पीड़ितों को केवल धोखा दे रही है.
ये भी पढ़ें- खजुराहो में राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आगाज़
यह गैस पीड़ितों के साथ अन्याय है. वहीं भोपाल के गैस पीड़ितों का कहना है कि सरकार से जो अपेक्षाएं गैस प्रभावितों को थी वे अब तक पूरी नहीं हो पायी है. आज भी कई लोग ऐसे हैं जो पर्याप्त मुआवजे की राह देख रहे है.
वेब डेस्क, IBC24