छतरपुर।किसी का गुस्सा उसे किस हद तक तकलीफ दे सकता है इसे समझने के लिए हमे छतरपुर के बैजनाथ की ज़िंदगी को समझना होगा। जो पिछले 20 साल से बेड़ियो में जकड़ हुआ है। रौंगटे खड़ी कर देने वाली कहानी है छतरपुर के बैजनाथ की जो पिछले 20 सालो से अंधेरे कमरे में बेड़ियो से जकड़ा है,जिसे इंतजार है कि कोई उसे बेड़ियो के बंधन से मुक्त कर दे।
ये भी पढ़ें –एक माह से बेरोजगार चल रहे निकाल सकते हैं अपने ईपीएफ से 75 प्रतिशत राशि
बता दें कि बैजनाथ छतरपुर जिले के हरपुर गाव के रहने वाले है,अंधेरा सन्नाटा और बेड़िया ही उनके साथी है,सुबह शाम बारिश तो उसने बीते 2 दशक से देखी ही नही,बैजनाथ 1 बंद कमरे में बेड़ियो से बंधा रहता वही वह 2 वक्त की रोटी खाता है और जो भी आवश्यक कार्य होते वह इसी बंद कमरे में करने मजबूर है। आपको बता दें कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं है। वह तो कैद है परिजनों के डर से कि कही बैजनाथ किसी को मौत के घाट न उतार दे।
ये भी पढ़ें –दुनिया में ऐसा कोई धर्म नहीं जो गौ हत्या को बढ़ावा देता है: इंद्रेश कुमार
बैजनाथ के परिजनों की माने तो 20 साल पहले बैजनाथ जब सरकारी जमीन पर रस्सी बनाने वाली पेड़ की जड़ खोद रहा था,तो गाव के कुछ लोग उसे रोकने लगे और जब वह नही माना तो एक ने उसे थप्पड़ जड़ दिया,जिससे गुस्साए बैजनाथ ने उन लोगो पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया जिससे उसे 2 माह की जेल हो गई, जिसके बाद बैजनाथ के सिर पर खून सवार हो गया और वह लोगो को मारने की फिराक में घूमने लगा,इसी डर और आशंका के चलते परिजनों ने बैजनाथ को एक बंद कमरे में बेड़ियो से जकड़ कर कैद कर दिया और वह 20 सालो से इसी तरह बेड़ियो से बंधकर दिल दहला देने वाली यातनाओ से गुजर कर अपनी जिंदगी के एक एक क्षण काटने को मजबूर है।
वेब डेस्क IBC24