रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार चाहे कितने भी विकास के दावे करें, लेकिन सरकार की पोल उस वक्त खुल जाती है जब आप प्रदेश के वनांचल क्षेत्र बस्तर की बात करते हैं। राज्य बनने के 18 साल बाद भी बस्तर के बनांचल क्षेत्र के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां आज भी विकास की चिड़िया सिर्फ सरकारी कागजों में दिखाई देती है। बता दें छत्तीसगढ़ की पिछली सराकार ने अपना स्लोगन दिया था ‘सबका साथ-सबका विकास’ लेकिन कोंडागांव के इस स्कूल को देखकर आपको पता चला जाएगा कि इस गांव के स्कूल को सरकार का कितना साथ मिला और कितना विकास हुआ।
Kondagaon: Classes of a govt school are conducted in a hut; school remains closed during monsoon. Teacher Mansharam says, “I’m teaching here since 2011, then the classes used to be conducted at a house. Authorities only assure us that a building will be made”. #Chhattisgarh pic.twitter.com/F9winPGznw
— ANI (@ANI) March 26, 2019
दरसअल कोंडागांव जिले के एक ऐसे स्कूल की तस्वीर सामने आई है, जहां स्कूल भवन हीं नहीं है। यह स्कूल एक छोटी सी झोपड़ी में संचालित होता है। झोपड़ी की हालत इतनी जर्जर है कि स्कूल को बरसात में बंद करना पड़ता है, जिससे बच्चो की पढ़ाई का नुकसान होता है। इस स्कूल के लिए ब्लॉक एवं जिला स्तर के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन सिर्फ वादे ही मिले और कुछ नहीं।
इस स्कूल के शिक्षक मेश्राम ने बताया कि मैं इस स्कूल में साल 2011 से पदस्थ हूं, तब स्कूल का संचालन एक घर में किया जाता था। लेकिन अब स्कूल का संचालन इस झोपड़ी में होता है। कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूल भवन की मांग की गई, लेकिन उन्होंने आज तक अश्वासन के सिवाए कुछ नहीं दिया।