Reported By: Vijendra Pandey
,Twisha Sharma Death Case Update / Image Source : FILE
जबलपुर: twisha Sharma Death Case : त्विषा शर्मा डैथ केस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने कल बड़ा फैसला सुनाते हुए, पूर्व जज और त्विषा की सास गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि सीबीआई गिरीबाला सिंह को जल्द गिरफ्तार कर सकती है। इस मामले में बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि मृतका त्विषा की डेडबॉडी में चोट के 7 निशान मिले हैं, जो मौत से पहले आएं थे। उन्होंने बताया की गिरिबाला सिंह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहीं थीं।
आपकों बता दें की त्विषा शर्मा डैथ केस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए, पूर्व जज और त्विषा की सास, गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। Twisha Sharma Death Case : हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों, केस डायरी और सुबूतों पर विचार किए बिना आरोपी को राहत दे दी थी।
सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर छह एंटीमॉर्टम चोटें पाई गईं, जिनमें सिर और हाथों पर चोटें शामिल थीं। AIIMS की क्वेरी रिपोर्ट में ये स्पष्ट किया गया कि चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी की, वो ये कि मृतका और आरोपी एक ही घर में रह रहे थे और मृतका के शरीर पर चोटों के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
हाईकोर्ट ने माना कि व्हाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों से केवल पति ही नहीं बल्कि गिरीबाला सिंह पर भी प्रताड़ना और गर्भपात के लिए दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। कोर्ट ने ये भी उल्लेख किया कि जांच एजेंसी द्वारा कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आरोपी ने सहयोग नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रॉसिक्यूशन के महत्वपूर्ण तथ्यों को महत्व नहीं दिया और केवल बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर भरोसा किया।
अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में अग्रिम जमानत देते समय अदालतों को जांच पर संभावित प्रभाव, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने माना कि इस मामले में जांच प्रारंभिक अवस्था में थी और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसी के साथ हाईकोर्ट ने, गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया है। अब सीबीआई उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है