Twisha Sharma Death Case Update : पुलिस की आंखों में धूल झोंककर बचना चाहते थे गिरीबाला और समर्थ सिंह? महाधिवक्ता ने खोल दी पोल, बताया त्विषा के शरीर पर कैसे लगी थी चोट

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त्विषा शर्मा डैथ केस में जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज और मृतका की सास गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने पोस्टमार्टम और AIIMS रिपोर्ट के आधार पर गंभीर चोटों और जांच में असहयोग को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया। अब सीबीआई द्वारा उनकी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

  • Reported By: Vijendra Pandey

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 12:40 PM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 12:46 PM IST

Twisha Sharma Death Case Update / Image Source : FILE

HIGHLIGHTS
  • जबलपुर हाईकोर्ट ने गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी।
  • पोस्टमार्टम और AIIMS रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम चोटों की पुष्टि का उल्लेख किया गया।
  • कोर्ट ने जांच में असहयोग और गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया।

जबलपुर: twisha Sharma Death Case : त्विषा शर्मा डैथ केस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने कल बड़ा फैसला सुनाते हुए, पूर्व जज और त्विषा की सास गिरीबाला सिंह  को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि सीबीआई गिरीबाला सिंह को जल्द गिरफ्तार कर सकती है। इस मामले में बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि मृतका त्विषा की डेडबॉडी में चोट के 7 निशान मिले हैं, जो मौत से पहले आएं थे। उन्होंने बताया की गिरिबाला सिंह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहीं थीं।

ट्रायल कोर्ट ने सुबूतों पर विचार किए बिना दी थी राहत

आपकों बता दें की त्विषा शर्मा डैथ केस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए, पूर्व जज और त्विषा की सास, गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।  Twisha Sharma Death Case :  हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों, केस डायरी और सुबूतों पर विचार किए बिना आरोपी को राहत दे दी थी।

मृतका के शरीर पर छह एंटीमॉर्टम चोटें पाई गई

सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर छह एंटीमॉर्टम चोटें पाई गईं, जिनमें सिर और हाथों पर चोटें शामिल थीं। AIIMS की क्वेरी रिपोर्ट में ये स्पष्ट किया गया कि चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी की, वो ये कि मृतका और आरोपी एक ही घर में रह रहे थे और मृतका के शरीर पर चोटों के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

Giribala Singh Jail  गिरीबाला सिंह पर भी प्रताड़ना और गर्भपात का आरोप

हाईकोर्ट ने माना कि व्हाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों से केवल पति ही नहीं बल्कि गिरीबाला सिंह पर भी प्रताड़ना और गर्भपात के लिए दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। कोर्ट ने ये भी उल्लेख किया कि जांच एजेंसी द्वारा कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आरोपी ने सहयोग नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रॉसिक्यूशन के महत्वपूर्ण तथ्यों को महत्व नहीं दिया और केवल बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर भरोसा किया।

कभी भी हो सकती है गिरफ्तरी

अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में अग्रिम जमानत देते समय अदालतों को जांच पर संभावित प्रभाव, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने माना कि इस मामले में जांच प्रारंभिक अवस्था में थी और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसी के साथ हाईकोर्ट ने, गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया है। अब सीबीआई उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है

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