जनता मांगे हिसाब में अब बात मध्यप्रदेश की नरयावली विधानसभा सीट की
भौगोलिक स्थिति
सागर जिले में आती है नरयावली विधानसभा सीट
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है सीट
कुल मतदाता- 2 लाख 27 हजार 313
पुरुष मतदाता- 1 लाख 23 हजार 129
महिला मतदाता- 1 लाख 4 हजार 180
अनुसूचित और पिछड़ी जाति बाहुल्य क्षेत्र
फिलहाल सीट पर भाजपा का कब्जा
भाजपा के प्रदीप लारिया हैं वर्तमान विधायक
नरयावली विधानसभा क्षेत्र की सियासत
नरयावली विधानसभा की सियासत की बात करें तो…कांग्रेस के इस गढ़ में पिछली दो बार से भाजपा ने कब्जा जमाया हुआ है..अब जब चुनाव नजदीक है तो फिर से नरयावली का सियासी माहौल गरमाने लगा है..नेता टिकट की आस में फिर से एक्टिव मूड में आ गए हैं…भाजपा और कांग्रेस में टिकट के लेकर खींचतान कुछ ज्यादा ही नजर आती है…जाहिर है यहां उम्मीदवारों के नाम इतनी आसानी से तय होने वाले नहीं है
सागर जिले में आने वाली नरयावली विधानसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है… अनुसूचित और पिछड़ी जातियों की बहुलता वाली इस सीट पर फिलहाल सत्तारूढ़ भाजपा का कब्जा है..और प्रदीप लारिया यहां से विधायक हैं… नरयावली के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो ..कभी ये सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था…1977 से 1990 तक यहां की जनता ने कांग्रेस के प्रत्याशियों पर ही अपना भरोसा जताया है…हालांकि 1990 में भाजपा के नारायण प्रसाद कबीरपंथी ने कांग्रेस के विजय रथ को रोका और जीत दर्ज की..इसके बाद 1993 और 1998 में कांग्रेस ने फिर से सीट पर कब्जा किया.. 1998 में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र चौधरी चुनाव जीते..जिन्हें दिग्विजय सरकार में मंत्रिपद भी मिला…वर्तमान में प्रदीप लारिया यहां से भाजपा के विधायक है , लारिया यहां से दूसरी बार विधायक चुने गए है..
नरयावली में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है..नेता टिकट के लिए फिर से सक्रिय नजर आने लगे हैं..भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो वर्तमान विधायक प्रदीप लारिया को फिर से टिकट मिलने की उम्मीद है…इनके अलावा पूर्व विधायक नारायण प्रसाद कबीरपंथी और संतोष रोहित भी टिकट के दावेदार हैं… वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी का नाम सबसे आगे है..माधवी चौधरी और शारदा खटीक भी टिकट दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं..
कुल मिलाकर नरयावली में भाजपा और कांग्रेस के लिए सही उम्मीदवार का चयन करना इतना आसान नहीं होगा.. क्योंकि अगर कोई नाराज हुआ तो गुटबाजी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
नरयावली विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे
हर बार चुनाव से पहले नेता नरयावली की जनता से कई वादे करके वोट हासिल करते हैं..लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन वादों को नजरअंदाज कर दिया जाता है…बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्र की जनता व्यवस्था और जनप्रतिनिधि को कोसते नजर आते हैं.. जाहिर है इस बार भी चुनाव में पुराने मुद्दों का शोर ही सुनाई देना तय है..
नरयावली विधानसभा की अधिकांश ग्राम पंचायतें सागर जनपद क्षेत्र में आती है। आज भी यहां के लोगों को जरूरी कामों के लिए सागर जाना पड़ता है..जबकि नरयावली विधानसभा क्षेत्र की अधिकांश आबादी मकरोनिया में निवास करती है..मकरोनिया को नगर पालिका का दर्जा तो मिल गया लेकिन बुनियादी सुविधाओं से ये क्षेत्र अछूता रहा…सरकारी अस्पताल की जरुरत यहां का प्रमुख मुद्दा है।
इसके अलावा क्षेत्र में न तो कोई स्कूल है न ही बस स्टैंड..पेय जल की समस्या से भी स्थानीय लोगों दो चार हो रहे हैं..पीने के पानी के लिए भी ये क्षेत्र सागर नगर निगम पर आश्रित है..वहीं पानी सप्लाई को लेकर भी नगर निगम असफल साबित हुई है…कचरा कलेक्शन के लिए निजी कंपनी से करार तो हुआ लेकिन नरयावली सहित पूरे जिले का कचरा डंपिंग की जगह अभी तय नहीं है…वहीं कचरा निष्पादन पलांट नहीं होने की वजह से गंदगी से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। वर्तमान विधायक की निष्क्रियता भी आने वाले चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है..
वेब डेस्क, IBC24