अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के सैलाना विधानसभा सीट की..पहले इस विधानसभा सीट की प्रोफाइल पर एक नजर..
सैलाना विधानसभा की भौगोलिक स्थिति
रतलाम जिले में आती है विधानसभा सीट
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है सैलाना विधानसभा
ST वर्ग के लिए आरक्षित है सीट
ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र
कृषि और मजदूरी आजीविका का प्रमुख साधन
जनसंख्या- करीब 2 लाख 50 हजार
कुल मतदाता- 1 लाख 86 हजार
पुरुष मतदाता- 96 हजार
महिला मतदाता- 90 हजार
6 अन्य मतदाता
फिलहाल सीट पर भाजपा का कब्जा
भाजपा की संगीता चारेल हैं विधायक
सैलाना विधानसभा क्षेत्र की सियासत
चुनाव नजदीक आते ही सैलाना में सियासी पारा गरमाने लगा है….भाजपा और कांग्रेस में टिकट के लिए नेता जनता के बीच पहुंचने लगे है…और अपने-अपने तरीकों से टिकट पाने की जुगत में लगे हैं..ऐसे में दोनों दलों के हाईकमान के सामने चुनौती होगी कि वो जीतने वाले उम्मीदवार को ही चुनाव मैदान में उतारे।
मामा बालेश्वर दयाल की कर्मभूमि रही सैलाना मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अभेद्य किलों में से एक है..यहां कांग्रेस के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के टिकट पर प्रभुदयाल गहलोत यहां से 7 बार विधायक चुने गए..लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के इस गढ़ सेंध लगाई…और संगीता चारेल ने भाजपा का परचम लहराया। अब जब चुनावी साल है तो सैलाना में एक बार फिर सियासी पारा उफान पर है..राजनीतिक दलों में टिकट के लिए चर्चा और दावेदारी शुरू हो चुकी है.
भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो वर्तमान विधायक संगीता चारेल का नाम सबसे आगे है..हालांकि रतलाम लोकसभा उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की बड़ी हार के बाद उनकी दावेदारी को थोड़ा कमजोर करती है..वहीं जेडीयू छोड़कर भाजपा में आए नारायण मेढ़ा भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं…इनके अलावा हेमंत डामर को भी टिकट का दावेदार माना जा रहा है..वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में पिछला चुनाव हारने वाले हर्ष विजय गहलोत टिकट के सबसे मजबूत दावेदार हैं..जो युवा और आदिवासियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं..वहीं जिला पंचायत सदस्य रह चुके हालु भाभर और बबिता देवड़ा भी कांग्रेस से टिकट दावेदारों की लिस्ट में हैं।
कुल मिलाकर सैलाना में इस बार सियासी जंग दिलचस्प रहने वाला है..कांग्रेस जहां अपने पुराने गढ़ को हासिल करने का प्रयास करेगी..वहीं दूसरी और भाजपा दूसरी बार जीत कर यहां अपनी जड़ें और मजबूत करना चाहेगी।
सैलाना के प्रमुख मुद्दे
सैलाना में मुद्दों की बात करें तो यहां रहने वाले नेता हर बार आदिवासियों से वादों की झड़ी लगा देते हैं..लेकिन वो धरातल पर कहीं नजर नहीं आते..अब जब चुनावी साल है तो..जनता तैयार है..उन पुराने वादों का हिसाब लेकर..जिनको नजरअंदाज करना इतना आसान नहीं होगा
कुदरती रंग में रंगे सैलाना में विकास के रंग धुंधले से नजर आते हैं। जी हां आदिवासी बाहुल्य सैलाना अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है यहां केदारेश्वर मंदिर ,कीर्ति स्तम्भ और कैक्टस गार्डन पूरे विश्व में प्रसिद्ध है..जिन्हें देखने दूर-दूर से पर्यटक तो आते हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव और शासन-प्रसासन की अनदेखी के चलते सैलाना पर्यटन के नक़्शे पर अब तक नहीं आ सका है।
वहीं ये क्षेत्र अपनी बुनियादी सुविधाओं की कमी जूझ रहा है…क्षेत्र के बाजना, शिवगढ़, रावटी, सैलाना और अन्य छोटे-बड़े ग्रामीण क्षेत्र सड़कों से जरूर जुड़ तो गए है लेकिन रोजगार के कोई साधन नहीं होने की वजह से आदिवासी रोजगार के लिए पलायन कर रहे है। आदिवासी कल्याण विभाग के माध्यम से करोडों रुपए आदिवासियों के विकास के लिए खर्ज तो किए जा रहें हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आता..यहा के आदिवासी खुद को शोषित और उपेक्षित महसूस करते हैं।
क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो सैलाना, बाजना और रावटी में अस्पताल तो हैं लेकिन डॉक्टर्स और जरूरी सुविधाओं के अभाव के चलते इलाके के लोगों को इलाज के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.. वहीं भावान्तर योजना के लागू होने के बावजूद किसानों के पैसे बिचोलिये ले जाते हैं जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए भी किसानो को लंबा इन्तजार करना पड़ता है।
वेब डेस्क, IBC24