जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की प्रतापपुर विधानसभा सीट से…सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर.
बलरामपुर जिले में आती है विधानसभा सीट
विधानसभा में दो ब्लॉक शामिल
पुरुष मतदाता-1 लाख 16 हजार 16
महिला मतदाता- 98 हजार 823
वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा
रामसेवक पैकरा हैं बीजेपी विधायक
प्रदेश सरकार में गृहमंत्री हैं रामसेवक पैकरा
प्रतापपुर की पॉलिटिक्स
प्रतापपुर में सियासी बिसात बिछना शुरु हो गई है..क्योंकि चुनाव नजदीक हैं…वर्तमान में इस विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है और विधायक हैं रामसेवक पैकरा…लेकिन इस बार चुनावी समर में बीजेपी के सामने सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि JCCJ भी होगी।
प्रतापपुर विधानसभा सीट प्रदेश की हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार है..वो इसलिए क्योंकि इसी विधानसभा से वर्तमान में विधायक हैं रामसेवक पैकरा..जो कि प्रदेश सरकार में गृहमंत्री हैं…अब फिर विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो सियासी बिसात भी बिछना शुरु हो गई है…प्रतापपुर से इस बार भी बीजेपी से रामसेवक पैकरा ही मैदान में हो सकते हैं..इसके अलावा रामविचार नेताम भी दावेदार माने जा रहे हैं.
अब बात कांग्रेस की करें तो पूर्व विधायक प्रेमसाय सिंह सबसे प्रबल दावेदार हैं..प्रेमसाय सिंह ने 2003 में रामसेवक पैकरा को शिकस्त दी थी..लेकिन 2013 में रामसेवक पैकरा से हार गए… जिला पंचायत सदस्य जगत आयाम भी दावेदारों में से एक हैं..जहां बीजेपी और कांग्रेस में दावेदारों की लाइन लगी है तो वहीं JCCJ ने अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है…अब तक तो प्रतापपुर में चुनावी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस में होता आया है लेकिन इस बार JCCJ भी मैदान में होगी ।
प्रतापपुर के मुद्दे
प्रतापपुर में चुनाव आते ही हर बार विकास के वादे और दावे तो किए गए लेकिन हालात नहीं बदले..अगर बदले होते विकास की तस्वीर कुछ और होती…आज भी लोग कई समस्याओं से जूझते नजर आते हैं ।
सियासी नजरिए से तो हाइप्रोफाइल है प्रतापुर विधानसभा सीट लेकिन विकास के नजरिए से तस्वीर धुंधली नजर आती है…आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं…हालत ये की कई गांवों में आज भी रोड कनेक्टिविटी नहीं है..तो वहीं पेयजल संकट से भी जूझ रहे हैं ग्रामीण, गर्मियों में तो बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं लोग..प्रतापपुर में बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है.
रोजगार के साधनों के अभाव में पलायन थम नहीं रहा है…स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा भी बदहाल नजर आती है…कहीं स्कूल हैं तो बिल्डिंग नहीं..अगर बिल्डिंग है तो शिक्षक नहीं…उच्च शिक्षण संस्थानों के ना होने से छात्र आज भी बड़े शहरों का रूख करने को मजबूर हैं…शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं..। इन सब समस्याओं के बीच विधानसभा का अन्नदाता भी संकटों से घिरा नजर आता है ।
वेब डेस्क, IBC24