बीएसआरटीसी बिहार में पंजीकृत मंदिरों, मठों की चल और अचल संपत्तियों का आकलन करेगा

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बीएसआरटीसी बिहार में पंजीकृत मंदिरों, मठों की चल और अचल संपत्तियों का आकलन करेगा

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  • Publish Date - June 7, 2026 / 02:42 PM IST,
    Updated On - June 7, 2026 / 02:42 PM IST

(प्रमोद कुमार)

पटना, सात जून (भाषा) बिहार राज्य धार्मिक ट्रस्ट परिषद (बीएसआरटीसी) ने राज्य भर में पंजीकृत मंदिरों और मठों की सभी चल और अचल संपत्तियों का आकलन करने का निर्णय लिया है, ताकि उनके द्वारा संपत्तियों की अवैध बिक्री या खरीद पर रोक लगाई जा सके। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

बीएसआरटीसी ने सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया है कि निजी संगठनों या सरकारी निकायों द्वारा उनके परिसर में कोई भी गतिविधि बीएसआरटीसी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किए बिना न हो।

बीएसआरटीसी के अध्यक्ष रणबीर नंदन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “बीएसआरटीसी ने राज्य भर में पंजीकृत मंदिरों और मठों की सभी चल और अचल संपत्तियों का आकलन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य के लगभग 2,500 पंजीकृत मंदिरों और मठों को पत्र भेजा जाएगा। यह निर्णय पंजीकृत मंदिरों/मठों/ट्रस्ट की संपत्तियों की अवैध बिक्री/खरीद पर रोक लगाने के लिए लिया गया है।”

नंदन ने कहा कि राज्य सरकार पंजीकृत मंदिरों/मठों/ट्रस्ट की संपत्तियों की अवैध खरीद-बिक्री में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम-1950 के अनुसार राज्य के सभी सार्वजनिक मंदिरों/मठों, ट्रस्ट और धर्मशालाओं का बीएसआरटीसी में पंजीकरण अनिवार्य है।

बीएसआरटीसी अध्यक्ष ने कहा, “हमने एक धार्मिक कैलेंडर जारी करने का भी निर्णय लिया है, जिसमें सनातन धर्म के सभी त्योहारों, पूजाओं और अन्य धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख होगा।”

उन्होंने बताया कि ये कैलेंडर राज्य भर में पंजीकृत मंदिरों और मठों के माध्यम से जनता के बीच वितरित किए जाएंगे।

बीएसआरटीसी द्वारा संकलित नवीनतम आंकड़ों (35 जिलों से प्राप्त) के अनुसार, राज्य में लगभग 2,499 पंजीकृत और 2,512 अपंजीकृत मंदिर या मठ हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सारण जिले में सबसे अधिक 206 पंजीकृत मंदिर और मठ हैं, जिसके बाद मुजफ्फरपुर (187), मधुबनी (156), पटना (144), पूर्वी चंपारण (137) और पश्चिमी चंपारण (136) का स्थान आता है।

भाषा वैभव पारुल

पारुल