जोगी के साथ पीएम आवास जा रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, गिरफ्तार
जोगी के साथ पीएम आवास जा रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, गिरफ्तार
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक अजीत जोगी और उनके समर्थकों को पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री आवास जाने से दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर धरना स्थल के समीप रोक लिया। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने 400 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने सिर्फ पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल को आगे जाने की अनुमति दी। इसके बाद अजीत जोगी, अमित जोगी, धर्मजीत सिंह, देवव्रत सिंह और अनिल टाह ज्ञापन सौंपने पीएम आवास पहुंचे।
जोगी कांग्रेस के ज्ञापन में कहा गया है कि 2013 के वादे अनुसार के किसानों को 2100 रुपए समर्थन मूल्य और बक़ाया ३ साल का 300 रुपए बोनस दिया जाए। जब भाजपा शासित महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश में ऋण माफी की जा सकती है तो छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार न किया जाए। किसान आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए तत्काल ऋण माफ भी किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार की आउटसोर्सिंग नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए। स्थानीय भर्तियों में छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को 90% आरक्षण मिले। साथ ही कपड़ा धुलाई, दूध सप्लाई, मछली पालन आदि पाराम्परिक कार्य एवं जाति वर्ग से संबंधित ठेके दिल्ली, नागपुर, हैदराबाद और गुजरात की कंपनियों को न देकर छत्तीसगढ़ के धोबी समाज, यादव समाज एवं केंवट समाज के लोगों को दिए जायें।
आगे मांग की गई है कि छत्तीसगढ़ के 40 हज़ार परिवारों एवं संरक्षित जनजातियों को नष्ट कर रहे पोलावरम बांध के कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए। प्रभावित क्षेत्र में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में सर्वप्रथम जनसुनवाई कराई जाए, उनको बोलने का अवसर दिया जाए और उनको सुना जाए।
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साथ ही, केंद्र सरकार नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण पर रोक लगाए। निजीकरण का निर्णय बस्तर के लोगों के साथ धोखा है। बस्तरिया युवाओं को एनएमडीसी नगरनार संयंत्र में रोजगार में प्राथमिकता दी जाए। इसी तरह महानदी, इंद्रावती और कनहर नदियों से संबंधित अंतरराज्यीय समझौतों में छत्तीसगढ़ के साथ हो रहे अहित को रोका जाए। इन नदियों के पानी पर पहला अधिकार छत्तीसगढ़ के किसानों का है।
जोगी कांग्रेस ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था उत्पादन आधारित है जबकि जीएसटी केवल उपभोग पर देय है। इससे छत्तीसगढ़ को हो रहे सालाना 25 हज़ार करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा की जाए।
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कहा गया कि छत्तीसगढ़ की 35 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी/अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत है। उन्हें सरकार अवैधानिक तरीक़े से डीलमिली, नगरनार, घाटबर्रा आदि जगह उनके घरों और ज़मीन से जिस प्रकार बेदख़ल कर रही है। इसका सीधा परिणाम ‘पत्थरगढ़ी’ आंदोलन है। सुदूर अंचलों के लोगों के अस्तित्व पर मंडराते ख़तरे तथा नक्सल समस्या के विकराल रूप को देखते हुए, छत्तीसगढ़ राज्य को ‘विशेष राज्य’ का दर्जा दिया जाए ताकि छत्तीसगढ़ दूसरे विकसित राज्यों के समानांतर विकास कर सके।
ज्ञापन में उम्मीद जताई गई है कि प्रधानमंत्री होने के नाते छत्तीसगढ़ की जनता को आपसे आशाएं हैं कि आप जनहित में रखी गयी उपरोक्त सात मांगों का अध्ययन कर छतीसगढ़ के हित में उचित कदम उठाएंगे।
वेब डेस्क, IBC24

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