PRSU Inauguration: श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ के उद्घाटन में बवाल, इस वजह से पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं में झड़प, कई छात्र भेजे गए जेल
PRSU Inauguration: रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब NSUI कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम का विरोध शुरू कर दिया। इ
PRSU inauguration/image source: PRSU PORTAL
- NSUI ने रविशंकर विवि में विरोध किया
- छात्र-छात्राओं और पुलिस में झड़प हुई
- श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ का लोकार्पण हुआ
रायपुर: रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब NSUI कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम का विरोध शुरू कर दिया। इस विरोध के चलते विश्वविद्यालय परिसर में NSUI और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। PRSU Inauguration के दौरान हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई NSUI कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल परिसर ले जाया।
दरअसल, विश्वविद्यालय में आयोजित PRSU Inauguration कार्यक्रम में RSS के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल विशेष रूप से शामिल हुए थे। इसी को लेकर NSUI ने कड़ा ऐतराज जताया। NSUI कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार विश्वविद्यालयों को RSS का गढ़ बनाने की कोशिश कर रही है, जो शिक्षा की स्वतंत्रता के खिलाफ है। विरोध कर रहे छात्रों ने नारेबाजी की और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई।
PRSU NSUI Protest: NSUI का आरोप
NSUI नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को शोध और शिक्षा का केंद्र होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा का मंच। उनका कहना है कि शंकरदेव जैसे महान संत के नाम पर आयोजित PRSU Inauguration कार्यक्रम में RSS पदाधिकारी की मौजूदगी राजनीतिक एजेंडे को दर्शाती है। NSUI ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने सख्ती बरती।
PRSU inauguration: पुलिस और प्रशासन का पक्ष
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, PRSU Inauguration कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। जब NSUI कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, तब स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में सभी को सेंट्रल जेल परिसर ले जाया गया।
PRSU Inauguration News: CM विष्णु देव साय का बयान
PRSU Inauguration कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। उन्होंने श्रीमंत शंकरदेव के योगदान को याद करते हुए कहा कि भले ही शंकरदेव का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से असम रहा हो, लेकिन उनके विचारों और सामाजिक जागरण का प्रभाव पूरे देश में पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को शंकरदेव के जीवन, उनके आदर्शों और सामाजिक सुधारों से परिचित कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ के माध्यम से उनके जीवन, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक योगदान पर गंभीर और अकादमिक अध्ययन किया जाएगा, जिससे युवाओं को भारतीय संत परंपरा को समझने का अवसर मिलेगा।
Srimanta Sankardev: श्रीमंत शंकरदेव कौन थे?
श्रीमंत शंकरदेव 15वीं–16वीं सदी के महान संत, समाज सुधारक, कवि और नाटककार थे। उन्होंने एकाशरण धर्म (नव-वैष्णव आंदोलन) की स्थापना की और भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रचार किया। शंकरदेव ने असमिया संस्कृति को एक नई पहचान दी। उन्होंने सत्त्रिया नृत्य, अंकिया नाट (एकांकी नाटक) जैसी कलाओं को जन्म दिया और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उनका उद्देश्य समाज को भक्ति, समानता और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधना था।
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