शिक्षाकर्मियों को हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार, कानूनी पेंच के कारण बढ़ सकता है कार्यकाल

शिक्षाकर्मियों को हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार, कानूनी पेंच के कारण बढ़ सकता है कार्यकाल

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  • Publish Date - April 5, 2018 / 06:05 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:57 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पौने दो लाख शिक्षाकर्मी संविलियन सहित अन्य मांगों के लिए हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि कमेटी अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट देने की मियाद गुरूवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि हाईपावर कमेटी को कुछ और समय दिया जा सकता है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षाकर्मियों का संविलियन किस तरह करती है, छत्तीसगढ़ में भी इसका इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि संविलियन को लेकर सरकार कोर्ट कचहरी से बचना चाहती है। आशंका जताई जा रही है कि मध्यप्रदेश में कानूनी पेंचदिगियों के कारण फैसले में दोरी हो रही है। 

 

 

छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के बाद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने पांच दिसंबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी के गठन की घोषणा की थी। कमेटी की रिपोर्ट तीन माह के भीतर आनी थी। इस लिहाज से 5 मार्च को रिपोर्ट आनी थी, लेकिन कमेटी को एक माह का एक्सटेंशन दिया गया। इस तरह आज 5 अप्रैल को समय सीमा खत्म हो रही है। शिक्षाकर्मी कमेटी की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अगर, आज रिपोर्ट सौंप दी गई तो सरकार उस पर फैसला लेगी, अन्यथा कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल इस बात के आसार ज्यादा नजर आ रहे हैं कि कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया जाए।

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जानकारों का कहना है कि कमेटी और शिक्षाकर्मियों की पिछली बैठक में दोबारा सभी संघों के साथ चर्चा करने की सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक बैठक नहीं हो पाई है। सरकार और अफसर मार्च में लोक सुराज कार्यक्रम में व्यस्त थे, ऐसे में कमेटी को एक्सटेंशन देकर शिक्षाकर्मियों की बैठक की जा सकती है। 

उल्लेखनीय है कि शिक्षाकर्मियों की सबसे बड़ी मांग संविलियन की है। मध्यप्रदेश सरकार ने संविलियन की घोषणा कर भी दी है। ऐसे में यहां के शिक्षाकर्मी भी संविलियन के लिए दबाव बनाए हुए हैं, जबकि राज्य सरकार के अफसरों की दलील है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मी पंचायत, नगरीय प्रशासन, आदिमजाति विभाग के अंतर्गत आते हैं और इनका सीधे संविलियन करने में कानूनी दिक्कत है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में घोषणा के इतने समय बाद भी वह लागू नहीं हो पाया है। लिहाजा राज्य सरकार को मध्यप्रदेश सरकार के कदम का इंतजार है। 

छत्तीसगढ़ में इस साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसमें शिक्षाकर्मी एक बड़ा मुद्दा है। विपक्ष इस मसले पर सरकार को घेरने के मूड में भी है। ऐसे में सरकार कोई गलती करने की स्थिति में नहीं है। इस संबंध में जो भी फैसला लिया जाएगा, वह ठोस होगा, अन्यथा चुनावी में इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।

 

वेब डेस्क, IBC24