रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर अरसे से बहस-मुबाहिसे होते रहे हैं और ये अनुमान भी लगता रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव के पहले सरकार इसे ट्रंप कार्ड के तौर पर यूज कर सकती है, पर इसी बीच राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल ने सीधे तौर पर ऐसी किसी संभावना को ख़ारिज कर दिया है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां शराब एक बड़ी सामाजिक बुराई के तौर पर सामने आती है और जिससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थिति में ये उम्मीद थी कि इसे लेकर सरकार एक्शन मोड में आएगी..पर ये उम्मीद अब टूटती दिख रही है। इस सूरतेहाल में सवाल ये उठता है कि शराब पर सरकार के इस रूख से उसे फायदा पहुंचेगा या नुकसान?
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छत्तीसगढ़ में शराबबंदी से जुड़ी सारी ख़ामख़याली ख़त्म क्योंकि राज्य के आबकारी मंत्री ने इस पर अपनी दो टूक राय ज़ाहिर कर दी है। अरसे से ये अटकलें लग रही थीं कि चुनावी साल में रमन सरकार अपना ब्रह्मास्त्र चलाएगी और प्रदेश की महिला वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए ऐन वक्त पर शराबबंदी का एलान कर देगी। सरकार ने बार-बार अपने बयानों और नीतियों के ज़रिए ये संकेत भी दिया कि वो शराबबंदी की तरफ बढ़ रही है।
पहले निजी ठेकों को ख़त्म करना। फिर 1 अप्रैल से ख़ुद शराब बेचने का फैसला करना। फिर शराब खरीदी का कोटा फिक्स करना। साथ ही गांव-गांव में महिलाओं को शराब के खिलाफ एकजुट करना। ये तमाम कोशिशें ये कह रही थीं कि सरकार शराबबंदी के लिए माहौल तैयार कर रही है पर जब आबकारी मंत्री ने ये कहा कि कोई दुकान बंद नहीं होगी तो सारे कयासों का अंत हो गया।
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चुनावी साल है। इस साल शराब का रोल काफी अहम हो जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान शराब किस तरह मेंडेट को प्रभावित करती है ये जगजाहिर है तो दूसरी ओर महिलाओं का शराबबंदी के प्रति आग्रह भी ज़ाहिर है। ऐसे में फैसला सरकार को लेना है पर फिलहाल उसका जो रूख है वो ये बताता है कि वो शराबबंदी के मूड में नहीं है। हालांकि सवाल ये उठता है कि ऐसा करके वो कोई चूक तो नहीं कर रही। क्योंकि इस वक्त शराब पर बैन लगाकर महिलाओं का दिल जीतने का सुनहरा मौका उसके पास है।
वेब डेस्क, IBC24